महराजबंद तालाब के सफाई लिए बृजमोहन अग्रवाल की कोई रूचि नही जिस पर सी.सी.एफ.-रायपुर अरुण पाण्डेय से हुई बातचीत को सुनिये

 

जल संसाधन महासमुंद में अनेकों ऐसे कर्मचारी हैं जो कि वर्षो से महासमुंद जल  संसाधन संभाग में पदस्थ हैं जिस कारण स्थानीय राजनीति में दखल रखते हैं और जल संसाधन विभाग के कार्यालय में समय पर नहीं आते और न ही कार्यालयीन कार्य में रूचि रखते हैं कुछ लोक सेवक तो मुख्यालय में न रहकर मनचाहे जगह से आना जाना करते हैं जिस कारण ठेकेदार अपनी मनमानी करते हैं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संसाधन संभाग महासमुंद में निम्न कार्य चल रहे हैं

  1. कोसरंगी एनीकट कम रपटा का निर्माण कार्य , लागत राशि 50,39,648 रूपये , ठेकेदार का नाम शारदा कंसट्रकसन कम्पनी
  2. बेन्द्री नाला व्यपवर्तन के शीर्ष कार्य का निर्माण , लागत राशि 56,88,764 रूपये , ठेकेदार का नाम एच.पी. कंस्ट्रकसन
  3. डूमरपाली व्यपवर्तन योजना के शीर्ष कार्य निर्माण , लागत राशि 38,99,528 रूपये , ठेकेदार का नाम आशीष कुमार अग्रवाल
  4. मेमरा जलाशय के नहर के चैन क्र. 53 के कि.मी. 161.38 केनाल क्रासिंग हाईड्रालिक पद्धति से निर्माण कार्य , लागत राशि 18,09,080 रूपये , ठेकेदार का नाम इस्कैब टेक्नोकस्पर्ट
  5. जोंक नदी पर लोवर बैराज शीर्ष कार्य एवं आर.बी.सी. मुख्य नहर 0 से 5220 तथा 9 नग पक्के कार्य , लागत राशि 2,29,92,600 रूपये , ठेकेदार का नाम सुनील कुमार अग्रवाल
  6. अर्जुन्दा अर्तुंडा बानुभाठा व्यपवर्तन योजना के शीर्ष कार्य , लागत राशि 19,66,909 रूपये , ठेकेदार का नाम चौहान ड्रिलिंग वर्क्स
  7. सिगबहाल जलाशय के मुख्य नहर के आर.डी. 9150 से 18900 मी. तक मिट्टी कार्य 39 नग पक्के निर्माण कार्य , लागत राशि 2,0 3,14,682 रूपये , ठेकेदार का नाम आर्य कंस्ट्रक्सन कंपनी
  8. जोंक नदी पर लोवर जोंक बैराज शीर्ष कार्य एवं आर.बी.सी. मुख्य नहर 0 से 5220 तथा 9 नग पक्के कार्य , लागत राशि 2,96,38,220 रूपये , ठेकेदार का नाम सुनील कुमार अग्रवाल
  9. कटंगी नाला व्यपवर्तन योजना के शीर्ष कार्य निर्माण , लागत राशि 12,82,428 रूपये , ठेकेदार का नाम पवन कुमार अग्रवाल
  10. दर्राभाठा व्यपवर्तन योजना के शीर्ष कार्य का निर्माण , लागत राशि 48,37,333 रूपये , ठेकेदार का नाम सिद्धि विनायक कंस्ट्रक्सन कंपनी
  11. सुखानाला व्यपवर्तन योजना का शीर्ष कार्य निर्माण , लागत राशि 16,00,000 रूपये , ठेकेदार का नाम डी.ए. इंटरप्राइजेस

“जल संसाधन के भाग्य विधाता” को इन सब साईट में जाकर कार्यों की प्रगति देखने की कोई रूचि नहीं रहती न ही वे इस बात की फ़िक्र करते है कि जनता के टैक्स के पैसे से करोड़ों के जो निर्माण कार्य हो रहे हैं उसकी क्वालिटी उत्तम कैसे हो जिस कारण आए दिन जल संसाधन संभाग महासमुंद सुर्ख़ियों में रहता है .

जल संसाधन संभाग महासमुंद में सूचना के अधिकार के आवेदन लगाने से कोई जानकारी नहीं दी जाती एक तरफ “जल संसाधन के भाग्य विधाता” राम कथा लोगों को सुनाने में लगे हैं तो दूसरी तरफ उनके ही लोग जनता के टैक्स के पैसे से मौज मस्ती कर रहे हैं.

जल संसाधन विभाग में अभी तक सूचना के अधिकार की धारा 4 को लागू नहीं किया गया है जबकि इसे  सूचना के अधिकार के लागू होने के 120 दिन के भीतर जल संसाधन विभाग को अपने वेबसाइट में डाल दिया जाना चाहिए था मगर सूचना के अधिकार के लागू हुए 12 साल हो गए मगर धारा 4 अभी तक लागू नहीं हुआ है.

कुछ लोग ऐसे हैं जो 1 दिन में 1 करोड़ रूपये की अवैध उगाही कर लगभग 25 लाख रूपये रोज खैरात बांटते हैं. इस 1 करोड़ की अवैध उगाही का कुछ हिस्सा जल संसाधन से आता है.              

रायपुर.देश के राज्यों में हो रहे विकास को मापने वाली प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने साल 2013 से 17 के लिए स्टेट्स ऑफ ग्रोथ नाम से मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें छत्तीसगढ़ को देश के सबसे तेज बढ़ते तीन राज्यों में शामिल किया है। क्रिसिल के मुताबिक छत्तीसगढ़ के साथ गुजरात और हरियाणा का नंबर है।


- क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य स्तरीय प्रदर्शन में कई भिन्नताएं हैं। राज्यों का प्रदर्शन मुद्रास्फीति और राजकोषीय, स्वास्थ्य जैसे मानकों पर आंका गया है।

- रिपोर्ट के अनुसार निर्माण और विनिर्माण में जहां गुजरात पहले नंबर पर है तो विनिर्माण एवं व्यापार, परिवहन और संचार सुविधाओं में छत्तीसगढ़ और हरियाणा शीर्ष पर हैं। ये तीनों राज्य रोजगार पैदा करने में भी सबसे ज्यादा कामयाब रहे।

- इन तीनों राज्यों में पिछले चार सालों में महंगाई, राष्ट्रीय औसत से भी कम रही। अध्ययन में क्रिसिल ने यह भी पाया कि यूपी, पंजाब और राजस्थान पर सबसे अधिक कर्ज है जबकि छत्तीसगढ़, कर्नाटक और महाराष्ट्र पर सबसे कम कर्ज है।

- रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ पर करीब 35 हजार करोड़ का कर्ज है। दूसरी तरफ इस अवधि में केरल, उत्तरप्रदेश और पंजाब में सबसे धीमा विकास रहा। यह रिपोर्ट नोटबंदी के पहले के आंकड़ों पर आधारित है।

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