सूचना के अधिकार से हुवा 28,409 करोड़ का घोटाला उजागर

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी बताती है कि पंजाब नेशनल बैंक की ओर से दिए गए कर्ज में से लंबित पड़े या यूं कहें कि ऐसा कर्ज, जो वापस न आने वाला है, उसमें से वर्ष 2012-13 में 997 करोड़, वर्ष 2013-14 में 1947 करोड़, वर्ष 2014-15 में 5996 करोड़, वर्ष 2015-16 में 6485 करोड़, वर्ष 2016-17 में 9205 करोड़ और वर्ष 2017 में छह माह अप्रैल से सितंबर तक 3778 करोड़ की राशि को आपसी समझौते के आधार पर राइट ऑफ किया गया है.


आरबीआई की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर देखा जाए, तो एक बात साफ हो जाती है कि पीएनबी के साढ़े पांच साल में 28,409 करोड़ रुपये राइट ऑफ किए गए हैं. अपने जवाब में आरबीआई ने इसे आपसी समझौते (इंक्लूडिंग कम्प्रोमाइज) के आधार पर राइट ऑफ किया जाना माना है. बैंकिंग कारोबार से जुड़े एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया है कि बैंकों की स्थिति गड़बड़ाने का एक बड़ा कारण एनपीए है और दूसरा उसे राइट ऑफ किया जाना. यह वह रकम होती है, जो वसूल नहीं की जा सकती. सीधे तौर पर कहा जाए तो यह राशि बैलेंस शीट से ही हटा दी जाती है.

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