19 October 2017
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गरियाबंद जिले के मुख्यालय से नदारत अधिकारी

गरियाबंद जिले के कई ऐसे अधिकारी और कर्मचारी है जो रायपुर से रोज आना-जाना करते है जिस कारण आम नागरिको को सरकारी काम निपटने में दिक्कत होता है जो अधिकारी और कर्मचारी रायपुर से आना-जाना करते है उन्हे गरियाबंद बस स्टेंड में रोज सबेरे 12 बजे से 6 बजे के बीच में देखा जा सकता है, जिसमे से ज्यादा तर लोग स्वास्थ्य vibhaविभाग, शिक्षा विभाग, वन विभाग, पी डब्लू.डी., जल संसाधन , पंचायत विभाग और अन्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी है, जिन अधिकारी और कर्मचारी की उपरी कमाई है वे बाकायदा अपने निजी लक्जरी कार से आते है और जिनके उपरी कमाई नहीं है वो लोग बस से रायपुर से आना जाना करते है, सबसे ज्यादा स्वास्थ्य vibhaविभाग, शिक्षा विभाग के लोग गरियाबंद से रायपुर आना – जाना करते है, जिला प्रशासन, गरियाबंद को मुख्यालय से नदारत व लेट से आने वाले अधिकारियो व कर्मचारियो को बस स्टैंड गरियाबंद में रंगे हाथ पकड कर तुरंत निलबित कर देना चाहिये तथा इनके खिलाफ छत्तीसगढ़ राज सिविल सेवा नियम के तहत कार्यवाही किया जाना चाहिये, वैसे सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट आदेश निकला है की जिसका जो मुख्यालय है उसे मुख्यालय में ही रहना होगा, परन्तु गरियाबंद जिले के कुछ अधिकारी और कर्मचारी इसका पालन नहीं करते, इसकी शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भी हो गई है जल्द ही जो अधिकारी और कर्मचारी रायपुर से गरियाबंद आना-जाना कर रहे है उन्हे सुकुमा, बीजापुर ट्रान्सफर किये जाने का प्रस्ताव है, गरियाबंद से रायपुर आने-जाने वाले बस में कुछ अधिकारी और कर्मचारी नकाब पहन कर बस में सफ़र करते है जबकि गरियाबंद प्रदेश का सीमावर्ती जिला है और नक्सली समस्या से ग्रसित है इस कारण बस में नकाब पहन कर सफ़र करने वालो सवारी को बस में बैठना ही नहीं चाहिए पर गरियाबंद में राम राज है,

कुछ रसूखदार अधिकारी और कर्मचारी है जो गरीब आदिवासी को बस की सीट से उतार कर स्वयं बैठ जाते है, यदि गरीब आदिवासी विरोध करे तो उससे मारपीट, गाली-गलौज देकर बीच जंगल में बस से उतार देते है, इस तरह सरकारी अधिकारी और कर्मचारी बस में खुल कर दादागिरी करते देखे जा सकते है, इस पर जिला प्रशासन, गरियाबंद को सख्ती से कदम उठाना चाहिए, एक बार यदि आर.टी.ओ. बस का परमिट को रदद करे तो बस में नकाब पहन कर अधिकारी और कर्मचारी बैठना बंद हो जावेगा, गरियाबंद जिले के वन विभाग का तो काम करने का अंदाज़ ही जुदा है, एक वन अधिकारी जिस पर अपने बंगले में रोज नई आइटम के साथ देखा जाता है उसे गरियाबंद जिले के अधिकारी नज़र अंदाज़ कर देते है जिस कारण वन विभाग की छबी ख़राब होती है जिस पर जिला प्रशासन खामोश है, उल्टा यह कहते है की ठाकुरों का तो राजशी शौक है यदि गरियाबंद जिले में अंगद की तरह पैर जमाये अधिकारी और कर्मचरियो की सूची बनाया ज़ावे तो बहुत लम्बी होगी, जिस पर जल संसाधन विभाग में कई कर्मचारी है, वही अनेक ऐसे शिक्षाकर्मी है जो 3 या 3 से अधिक संतान वाले होते हुवे भी वो बेखौफ होकर नौकरी कर रहे है अनेको बार मुख्य सचिव स्तर पर शिकायत करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती.

तो एक ही रास्ता, भ्रष्टाचारियों को है बहिष्कार करना.

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अपने आने वाले पीढ़ियों और देश की है रक्षा करना.
तो एक ही रास्ता, भ्रष्टाचारियों को है बहिष्कार करना.
किया गफलत या चूके तो सिर्फ बचेगा केवल पछताना.
कोसेगी हमको हमारी पीढियां, मुश्किल होगा मुह दिखाना.1111111FIR   BANEGI  SARKAR