21 July 2017
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छत्तीसगढ़ के आर.टी.आई.कार्यकर्त्ता एक जुटे होकर संधर्ष करे

अब जब मोदी जी को उत्तर प्रदेश में भारी सफलता मिली है तो उसके बाद अपने सरकार के उपर किसी प्रकार का भ्रष्टाचार का आरोप ना लगे इससे बचने के लिए अब मोदी सरकार आर.टी.आई.एक्ट में बदलाव कर रही है जिससे किसी प्रकार का भविष्य में भ्रष्टाचार का आरोप

ना लग सके, इस बदलाव के बाद आम नागरिक को आर.टी.आई.एक्ट के तहत जानकारी निकलवाने में बहुत मुश्किल होगा जिससे की भाजपा शासित प्रदेशो के कोई भी बेईमानी और भ्रष्टाचार को उजागर कर पाना मुश्किल होगा, ऐसे में सभी आर.टी.आई.कार्यकर्ता इस लिंक को खोल कर पढ़े

http://document.ccis.nic.in/WriteReadData/CircularPortal/D2/D02rti/1_5_2016-IR-31032017.pdf

और अब इसके विरुद्ध लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करवाना होगा, प्रदेश भर के आर.टी.आई.कार्यकर्ता, नागरिक संगठन, व्यापारी संगठन , महिला संगठन, छात्र संगठन व धर्मिक संगठन, जातीय संगठन एकजुट होकर आन्दोलन करना होगा, जब तक छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायत, ब्लाक, वार्ड, तहसील, नगर, जिला, स्तर से आन्दोलन नहीं होगा . तब तक छत्तीसगढ़ में पारदर्शी व्यवस्था लागु नहीं होगी. इसके लिए अब जो लोग समय दे सकते है वो सामने आये हमें उन लोगो को नहीं जोड़ना है जो अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए आकर हमसे सूचना के अधिकार का टूयुशन फ्री में लेकर मतलब साधना चाहते है, क्योकि ये मतलबी और स्वार्थी लोगो को जब आन्दोलन के लिए बुलाया जावेगा तब ये कोई ना कोई बहाना बना कर निकल लेगे, हमें देश के लिए समय देने वाले चाहिये ना की समय लेने वाले तभी भ्रष्टाचार व बेईमानी के विरुद्ध आन्दोलन सफल होगा और पारदर्शी व्यवस्था के लिए अपने ही संसाधन से सभी ग्राम पंचायत, ब्लाक,वार्ड, तहसील, नगर, जिला, स्तर तक आन्दोलन करे.

छत्तीसगढ़ में गरीबो को नहीं मिलती सूचना के अधिकार में जानकारी

छत्तीसगढ़ में अभी ३ सूचना आयुक्त है जबकि ७ सूचना आयुक्त के पद अभी खाली है

यदि वाकई में छत्तीसगढ़ शासन की मंशा रहती की छत्तीसगढ़ में १०० प्रतिशत पारदर्शी

व्यवस्था लागू हो तो मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति तुरन्त किया जाना चाहिये परन्तु

गत १० माह से मुख्य सूचना आयुक्त की पोस्टिंग नहीं हो रही है, एक तरफ मोदी जी देश

में पारदर्शी व्यवस्था लाने के लिए संघर्ष कर रहे है तो दूसरी तरफ मोदी जी के विचारधारा के विपरीत कुछ लोग छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने दे रहे है , यह छत्तीसगढ़ में मोदी जी के समर्थको के लिए निराशा का विषय है मीडिया में कई बार ये बात उठाया गया की क्यों मुख्य सूचना आयुक्त की पोस्टिंग नहीं किया जा रहा है जिस कारण अभी १० माह से १२ माह की पेंडेसी बढ गयी है छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग का तेजी से फैसला आने से जनता के अंदर ये भावना आवेगी की वाकई में सरकार जनता के साथ है उसके लिए छत्तीसगढ़ शासन को मोदी जी की तरह साहस दिखाना चाहिये, छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार सिर्फ रसूखदार लोगो के लिए जानकारी निकलवाने का तरीका है, छत्तीसगढ़ का गरीब आदमी तो सूचना का अधिकार का आवेदन लिख भी नहीं सकता है, यदि किसी तरह सूचना के अधिकार का आवेदन लिख भी लिया तो नगर निगम, राजस्व, ग्राम पंचायत में आवेदक के साथ मार-पीट करते है, वही महीनो चक्कर लगते है वही जिन लोगो को सूचना के अधिकार के अधिनियम की जानकारी है उन लोगो के हाथ तुरन्त जानकारी लग जाती है, इस प्रकार सिर्फ पैसे वाले और अमीर लोगो के लिए किसी भी विभाग से जानकारी निकलवाना ज्यादा सरल व आसान है जबकि गरीब और अनपढ़ लोगो के लिया जानकारी निकवाना बहुत ही कठिन काम है, जैसे ही जनसूचना अधिकार को पता चलता है की सूचना के अधिकार की जानकारी मागने वाला गरीब आदमी है, कुछ जनसूचना अधिकारी कोई न कोई बहाना बता कर जानकारी नहीं देता, वही अमीर व पैसे वाले लोगो को तुरन्त ही जानकारी मिल जाती है, ये लोकतंत्र के लिए बहुत ही लज्जा जनक है,.

आज विजयदशमी से भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान

छत्तीसगढ़ में गली गली में भ्रष्टाचारी लोगो का आतंक बडते जा रहा है ये बात भी तय है की इनको आगामी विधानसभा चुनाव २०१८ में भी नहीं हराया जा सकता, छत्तीसगढ़ के कुछ भ्रष्टाचारी लोगो के पास १० हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का कालाधन है जिस कारण ये सत्ता में हमेशा बने रहेगे ना तो इन्हे चुनाव के मैदान में हरा सकते है, अगर सिर्फ छत्तीसगढ़ की बात करे तो कुछ इसे चुने हुवे जनप्रतिनिधि है जिसको उनके जीते जी कोई नहीं चुनाव के मैदान में कोई नहीं हरा सकता और जब जब वो चुनाव जीत कर आवेगे तब तब बेईमानी कर जनता का शोषन करेगे, छत्तीसगढ़ में कण कण में बेईमानी और भ्रष्टाचार है, जिस पर छत्तीसगढ़ शासन में शिकायत करने पर कोई कार्यवाही नहीं होती जब हम चुने हुए प्रतिनिधि के पास जाकर शिकायत करते है तो वो लिखित में कोई जवाब नहीं देते ज्यादा दबाव डालने पर सीधे मुह पर कहते है जावो जो करना है कर लो इस तरह आम नागरिको के समस्या का कोई समाधान नहीं है, छत्तीसगढ़ आर.टी.आई.संघ ने सैकड़ो बार छत्तीसगढ़ शासन को लिख चूका है की छत्तीसगढ़ राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद को विज्ञापन के द्वारा भरा जावे वही ६ राज्य सूचना आयुक्त के पद भी विज्ञापन के द्वारा भरा जावे परन्तु कोई जवाब छत्तीसगढ़ शासन से नहीं मिलता है जब तक जनता की सहमती से १ पद छत्तीसगढ़ राज्य मुख्य सूचना आयुक्त व ६ पद राज्य सूचना आयुक्त नहीं भरे जावेगे आम नागरिको को न्याय नहीं निर्णय मिलेगा, इसी तरह कई जनहित के मुददे लंबित है जिसमे से

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Six Crucial Anti-Corruption Bills are due for consideration and passage.  They include the

1.Judicial Standards and Accountability Bill, 2012;

2. the Whistle Blowers Protection Bill, 2011;

3. the Prevention of Corruption (Amendment) Bill, 2013;

4. the Right of Citizens for Time Bound Delivery of Goods and Services Bill, 2011;

5. the Prevention of Bribery of Foreign Public Officials Bill, 2011

6.the Public Procurement Bill, 2012.

What should be our strategy on Six Crucial Anti-Corruption Bills pending in parliament ?  

What should be our strategy for implementation of Electoral and Police Reform?

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इस परिस्थिति में सिर्फ एक ही रास्ता है की इनके खिलाफ जंगी आन्दोलन किया जावे जिसके लिए हमे एक जुटे होना होगा, छत्तीसगढ़ आर.टी.आई.संघ ने तय किया कई की आज विजयदशमी के दिन से हम लोग राईट टू रिकॉल कानून बनाने के लिए आन्दोलन करेगे जिससे पुरे छत्तीसगढ़ के देशभक्त नागरिको को राईट टू रिकॉल ग्रुप के व्हाटएप्स व अन्य सोशल मीडिया के  द्वारा जोड़ा जावे, जिसमे जो लोग सब एडमिन बनना चाहते है अपना नाम देवे राईट टू रिकॉल ग्रुप में दे सकते है,  अभी तो प्रदेश व्यापी ग्रुप रहेगा फिर आगे चलकर जिलावार जैसे राईट टू रिकॉल ग्रुप रायपुर, राईट टू रिकॉल ग्रुप बिलासपुर, राईट टू रिकॉल ग्रुप दुर्ग, राईट टू रिकॉल ग्रुप राजनांदगांव, राईट टू रिकॉल ग्रुप कवर्धा, इसी प्रकार अन्य जिलो के ग्रुप होगा जोकि २४ घंटे व्हाटएप्स व अन्य सोशल मीडिया में सक्रीय रहेगा, इस व्हाटएप्स व अन्य सोशल मीडिया का उदेश्य बिना किसी का व्यक्तिगत नाम लिए साइबर कानून का पालन करते हुये राईट टू रिकॉल कानून बनाने के लिए जनक्रांति करना है जिसमे छत्तीसगढ़ के सभी देशभक्त नागरिक तन, मन, धन से अपना अपना योगदान देवे,

अब देश को देश की १२५ करोड़ जनता चलायेगी . क्यों की हमने जिनको चुन कर भेजा है. उनमे से कुछ तो भ्रष्टाचारी हो गए वहीं छत्तीसगढ़ के कुछ चुने हुए जनप्रतिनिधि तो बेईमानी.
करके १०००० करोड़ रुपया के असामी बन गयी है. अब इन्हे कोई चुनाव में नहीं हरा सकता इसीलिए अब देश भक्त जनता को जागना होगा. ओर इन्हे पद से हटने वाले वाला कानून ....राइट टू रिकॉल. ...को लागू करवाना होगा  ..जब पुरे देश की १२५ करोड़ जनता बेईमानो के खिलाफ होगी तभी...राइट टू रिकॉल ....लागू  होगा !
इस मैसेज को अधिक से अधिक फैलावो..ताकि भ्रष्टाचारी व बेईमान अधिकारी व नेता सुधर जावे.

इसीलिए अब देश भक्त जनता को जागना होगा. ओर इन्हे पद से हटने वाले आ कानून ....राइट टू रिकॉल. ...को लागू करवाना

अगर हमारे विचार से सहमत है तो ...राइट टू रिकॉल ...व्हॉटशॉप ग्रुप में जुड़े.
MO.8435471393
AND  9425520385
AND  9424283493

छत्तीसगढ़ में गरीबो को नहीं मिलती सूचना के अधिकार में जानकारी

  • छत्तीसगढ़ में अभी ३ सूचना आयुक्त है जबकि ७ सूचना आयुक्त के पद अभी खाली है
  • यदि वाकई में छत्तीसगढ़ शासन की मंशा रहती की छत्तीसगढ़ में १०० प्रतिशत पारदर्शी
  • व्यवस्था लागू हो तो मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति तुरन्त किया जाना चाहिये परन्तु
  • गत १० माह से मुख्य सूचना आयुक्त की पोस्टिंग नहीं हो रही है, एक तरफ मोदी जी देश
  • में पारदर्शी व्यवस्था लाने के लिए संघर्ष कर रहे है तो दूसरी तरफ मोदी जी के विचारधारा के विपरीत कुछ लोग छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने दे रहे है , यह छत्तीसगढ़ में मोदी जी के समर्थको के लिए निराशा का विषय है मीडिया में कई बार ये बात उठाया गया की क्यों मुख्य सूचना आयुक्त की पोस्टिंग नहीं किया जा रहा है जिस कारण अभी १० माह से १२ माह की पेंडेसी बढ गयी है छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग का तेजी से फैसला आने से जनता के अंदर ये भावना आवेगी की वाकई में सरकार जनता के साथ है उसके लिए छत्तीसगढ़ शासन को मोदी जी की तरह साहस दिखाना चाहिये, छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार सिर्फ रसूखदार लोगो के लिए जानकारी निकलवाने का तरीका है, छत्तीसगढ़ का गरीब आदमी तो सूचना का अधिकार काआवेदन लिख भी नहीं सकता है, यदि किसी तरह सूचना के अधिकार का आवेदन लिख भी लिया तो नगर निगम, राजस्व, ग्राम पंचायत में आवेदक के साथ मार-पीट करते है, वही महीनो चक्कर लगते है वही जिन लोगो को सूचना के अधिकार के अधिनियम की जानकारी है उन लोगो के हाथ तुरन्त जानकारी लग जाती है, इस प्रकार सिर्फ पैसे वाले और अमीर लोगो के लिए किसी भी विभाग से जानकारी निकलवाना ज्यादा सरल व आसान है जबकि गरीब और अनपढ़ लोगो के लिया जानकारी निकवाना बहुत ही कठिन काम है, जैसे ही जनसूचना अधिकार को पता चलता है की सूचना के अधिकारकी जानकारी मागने वाला गरीब आदमी है, कुछ जनसूचना अधिकारी कोई न कोई बहाना बता कर जानकारी नहीं देता, वही अमीर व पैसे वाले लोगो को तुरन्त ही जानकारी मिल जाती है, ये लोकतंत्र के लिए बहुत ही लज्जा जनक है,

छत्तीसगढ़ सूचना आयोग में ९९ प्रतिशत प्रकरण ख़ारिज होते है

छत्तीसगढ़ सूचना आयोग के यदि गत ५ साल का प्रकरण पर गौर करने से पता चलता है १०० प्रकरण में से ९९ प्रकरण ख़ारिज होते है, जिस १ प्रकरण में आवेदक के पक्ष में निर्णय होता है, वो किसी बहुत ही रसूखदार आवेदक के पक्ष में निर्णय होता है जिस कारण कुछ जनसूचना अधिकारी खुल कर मनमानी कर रहे है, जब तक जनता एक जुट होकर भ्रष्ट जनसूचना अधिकारी के खिलाफ धरना, प्रदर्शन, रैली नहीं निकालेगे, तब तक भ्रष्ट जनसूचना अधिकारी के दीमाक सही रास्ते पर नहीं आवेगा, छत्तीसगढ़ शासन एक तरफ पारदर्शिता की बडी बड़ी बात करती है दूसरी तरफ १० माह से मुख्य सूचना आयुक्त की पोस्टिंग नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ में पेडेसी २ से ३ साल की हो गई है, जिस पर छत्तीसगढ़ शासन खामोश है.

            वही कभी हमने विपक्षद्वय के नेता माननीय भूपेश बघेल जी , माननीय टी.एस.सिहदेव जी , माननीय अजित जोगी जी से यह कहते नहीं सुना की छत्तीसगढ़ शासन क्यों अभी तक मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही है, कभी हमने विपक्षद्वय के नेता माननीय भूपेश बघेल जी , माननीय टी.एस.सिहदेव जी , माननीय अजित जोगी जी से यह कहते नहीं सुना की छत्तीसगढ़ शासन क्यों २ से ३ साल की पेडेसी को काम करने के लिए छत्तीसगढ़ में ६ अन्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही है, इन हालत में सिर्फ कुछ नामी आर.टी.आई. आवेदकों को ही जानकारी बहुत संघर्ष के बाद मिलती है, गरीब, अनपढ़, बेबस, लाचार लोगो को छत्तीसगढ़ में कोई जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं मिलती वो सालो साल जानकारी प्राप्त करने के लिए भटकते है मगर उन्हे जानकारी नहीं दी जाती वही जो लोग आर.टी.आई. के खिलाड़ी है उनको जानकारी घर पंहुचा कर मिल जाती है, इस पर कई बार अनेक आर.टी.आई आवेदको ने माननीय भूपेश बघेल जी , माननीय टी.एस.सिहदेव जी , माननीय अजित जोगी जी को छत्तीसगढ़ शासन की मनमानी से अवगत करवाया पर माननीय भूपेश बघेल जी , माननीय टी.एस.सिहदेव जी , माननीय अजित जोगी जी अपने राजनेतिक दुश्मन को परास्त करने ने पूरी ताकत लगा दिए है,

            वही दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के बेईमान अधिकारियो ने माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को सूचना के अधिकार के बारे में रोज गलत शलत कान भरते है जिससे आम नागरिको को छत्तीसगढ़ शासन में चल रहे बेईमानी के बारे में पता ही ना चले हमारे सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ शासन के बहुत ही उच्च स्तर के अधिकारी लगातार ये फीड बैक माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को देते है की मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की कोई आवश्यकता नहीं है ये उच्च स्तर के बेईमान अधिकारी को मालूम है की यदि स्पीड के साथ जानकारी जनता के हाथ लगी तो उनको जेल जाना तय है इसिलिये ये उच्च स्तर के बेईमान अधिकारी माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को सूचना के अधिकार के बारे में बहुत ही गलत पिक्चर दिखा रहे है, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी किसी चापलूस अधिकारी की बात में आये बैगर अपने विश्वनीय लोगो से सर्वे करवाए जिससे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को सही और गलत का अहसास हो जावेगा, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंग जी यदि किसी ग्राम में १०० रुपए भेजते है तो ग्राम में ४० रुपए ही पहुचते है,

             माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंग जी को चाहिये की वो आर.टी.आई.के आवेदकों से सीधा मोबाइल लगा कर सूचना के अधिकार के बारे में ये सवाल करे की क्यों आपको जानकारी समय पर मिल रहा है, इससे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को आवेदको के द्वारा यही जवाब मिलेगा की कोई जानकारी नहीं देते उल्टा जानकारी के नाम पर प्रताड़ित करते है, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को यह भी बता दे ये वो बेईमान अधिकारी है जो पलक जपकते अपनी आस्था बदल देते है, इनसे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी सावधान रह कर सूचना के अधिकार के आवेदकों से सीधा संवाद कर सही गलत को जाने, क्या कोई बेईमान अधिकारी अपने खिलाफ सूचना के अधिकार अधिनियम को ताकतवर होने देगा, माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी छत्तीसगढ़ सूचना आयुक्त से ये भी जानकारी मगवाये की गत ५ साल में कितने जनसूचना अधिकारी के खिलाफ पेनाल्टी लगी और वो पेनाल्टी को किस दिनाक को जमा की उसकी पर्ची दिखाए, दरअसल माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को छत्तीसगढ़ के कुछ उच्च स्तर के बेईमान अधिकारी लगातार गलत बात बता रहे है, यदि वाकई में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी को ४ बार बी.जे.पी.की सरकार लानी है तो उच्च स्तर के बेईमान अधिकारी से सतर्क होकर स्वविवेक से काम लेवे, निश्चित ही ४ बार भी बी.जे.पी.की सरकार बनेगी, वरना सरकार से हटते ही ये उच्च स्तर के बेईमान अधिकारी अपना रंग बदल देगे.

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