21 July 2017
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BREAKING NEWS

कार्यालय कृषि उपज मंडी समिति आरंग. जिला – रायपुर (छ.ग.) के आडिट आब्जेक्शन का ब्यौरा जस का तस - भाग - 2

7) विवरण विकास निधि की राशि जमा हेतु शेष रु. 7597.00 :-

 

     छ.ग. राज्‍य कृषि उपज मण्‍डी अधिनियम 1972 की धारा 43 के प्रावधानानुसार विपणन विकास निधि की स्‍थापना की गयी जिसमें प्रत्‍येक मण्‍डी बोर्ड को अपनी सकल प्राप्तियों का 50 प्रतिशत राशि समय – समय पर उक्‍त निधि में जमा करेगी एवं धारा 44 के अनुरुप उक्‍त राशि का उपयोग छ.ग. राज्‍य विपणन बोर्ड द्धारा किया जावेगा । तदनुसांर दिनांक 31.03.2012 की स्थ्थिति में रु. 7597.00 विपणन विकास निधि में जमा होना शेष पाया गया । विवरण निम्‍नानुसार है :-

2011 – 12                       कुल राशि                       रु. 45311739.00

अर्थवर्ष 2011-12 में जमा राशि :-

दिनांक 31.03.2012 की स्थि‍ति में शेष राशि                           रु. 7597.00

अत: उपरोक्‍तानुसार विपणन विकास निधि की शेष राशि रु. 7597.00 मण्‍डी बोर्ड को भेजा जा कर आगामी अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवस्‍था करेंगे । 111KARAVASA

 

8) बोर्ड शुक्‍ल बकाया राशि रु. 20903.00:-

 

       छ.ग. राज्‍य कृषि उपत मण्‍डी अधिनियम 1972 (क्र.24/1973) की धारा 43 की उपधारा 1 अधिसूचना क्रमांक डी – 15.5 / 2000 / 14.3 भोपाल दिनांक 30.10.2000 के अनुसार मण्‍डी समिति की आय मण्‍डी शुक्‍ल. अनुज्ञप्ति शुक्‍ल एवं अन्‍य आय की गणना कर मण्‍डी बोर्ड को निर्धारित मान के अनुसार बोर्ड शुक्‍ल अंशदान देय होता है । उपलब्‍ध कराये गये लेखों के अनुसार दिनांक 31.03.12 की स्थिति में 20903.00 मण्‍डी बोर्ड शुक्‍ल अंशदान जमा किये जाने बाबत् शेष पाया गया । विवरण निम्‍नानुसार है:-

शेष अर्थवर्ष 2011-12                               20903.00

अत: अब राशि रु. 20903.00 बोर्ड शुक्‍ल अशंदान तमा से आगामी अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवरूथा करेंगे ।

 

9) अनुज्ञप्ति नवीनीकरण नहीं कराने से हानि संभावित राशि रु. 7400.00 :-

 

         कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग 2011-12 में व्‍यापारियों द्धारा अनुज्ञप्ति (लायसेंस) नवीनीकरण न कराये जाने से राशि रु. 7400.00 हानि संभावित है । छ.ग. कृषि उपज मण्‍डी अधिनियम 1972 की धारा 32 के अनुसार मण्‍डी क्षेत्र में व्‍यवसाय करने पर अनुज्ञप्ति नवीनीकरण कराया जाना आवश्‍यक है ।

अत: अब अनुज्ञप्ति नवीनीकरण नहीं कराए जाने वाले व्‍यापारियों से राशि रु. 7400.00 वसूल कर राशि मण्‍डी निधि में जमा से अंकेक्षण में जमा से अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवस्‍था करेंगे ।

अनुज्ञप्ति नवीनीकरण न कराए जाने वाले व्‍यापारियों की सूची प्रतिवेदन की परिशिष्‍ट क्रमांक 03 में संलग्‍न है ।

 

10) मण्‍डी कर्मचारियों द्धारा लिये गये अग्रिम एवं बकाया ऋण. बसूली हेतु शेष राशि रु. 353910.00

 

           कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग में कार्यरत कर्मचारियों अना

 

ज. त्‍यौहार एवं अवास हेतु लिए ऋण दिनांक 31.03.2012 की स्थिति में रु. 853910.00 वसूली हेतु शेष पाया गया ।

अत: उक्‍त राशि संबंधितों से वसूल कर राशि मण्‍डी निधि में जमा से आगामी अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवस्‍था करेंगे । बकाया अनाज. अग्रिम त्‍यौहार अग्रिम एवं अवास ऋण का विवरण परिशिष्‍ट क्रमांक 03 में संलग्‍न है ।

 

11) स्‍वीकृत राशि से अधिक व्‍यय रु. 30786.00 सक्षम स्‍वीकृति वांछित :- 111LOKSHABHA

 

         कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग हेतु मण्‍डी बोर्ड द्धारा नवीन मण्‍डी उदघाटन एवं कृषक सम्‍मेलन हेतु पत्र क्रमांक बी/312/11स्‍वी./9-10/608 दिनांक 28.05.09 को 2 लाख रु. एवं पत्र क्रमांक बी/3/2/11स्‍वी./08-09/877 दिनांक – 20.05.08 को 3 लाख रु. स्‍वीकृत किया गया था । जबकि मण्डी समिति आरंग द्धारा स्‍वीकृत राशि 5 लाख के विरुद्ध 530786.00 व्‍यय किया जाना पाया गया ।

अत: अब 30786.00 रु. अधिक व्‍यय का सक्षम स्‍वीकृति प्राप्‍त कर आगामी अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवस्‍था करें ।

 

12) निमार्ण कार्य देयक से रायल्‍टी की कटौती न किये जाने से शासन को हानि संभावित :-

 

       कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग नवीन मण्‍डी प्रांगण में सी.सी. रोड निर्माण कार्य प्रवीण बजाज द्धारा कार्य कराया गया । प्रकरण के अवलोकनानुसार तृतीय एवं अंतिम देयक तक कुल 1683959.00 व्‍यय होना पाया गया । अंतिम देयक के साथ प्रथम एवं द्धितीय चल देयक से काटी गयी सुरक्षा निधि की 75 प्रतिशत राशि भी वापस कर दी गयी किंतु रायल्‍टी की राशि कटौती किया जाननानही पाया गया एवं न ही कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र संलग्‍न होना पाया गया ।

अत: कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के अभाव में एवं रायल्‍टी की कटौती अथवा रायल्‍टी चुकता प्रमाण पत्र की अभाव में अंतिम देश्‍क की राशि किस आधार पर भुकतान की गयी वस्‍तुस्थिति स्‍पष्‍ट करें एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र एवं रायल्‍टी की कटौती न किये जाने के संबंध में जिम्‍मेदारी निर्धारित कर राशि वसूल कर शासन के निर्धारित शीर्ष में जमा कर आगामी अंकेक्षण को अवगत कराने की व्‍यवस्‍था करें ।

 

13) मूल राशि के बिना अमानत राशि वापय किसा जाना अनियमित :-

 

         कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग अर्थवर्ष 2011-12 के अंकेक्षण में पाया गया कि मूल रसीद प्रस्‍तुत किये बिना अमानत राशि वापस किया गया । मूल रसीद प्रस्‍तुत किए बिना अमानत राशि वापस किये जाने से दोहरे भुगतान की संभावना बनी रहती है । अत: भविष्‍य में बिना मूल रसीद प्रस्‍तुत किए अमानत राशि वापस न किए जाने बाबत् मण्‍डी समिति का ध्‍यान आकृष्‍ट किया जाता है । विवरण निम्‍नानुसार

क्र.   व्‍हाउचर             राशि               विवरण

    क्र.दि.

1     69/05.06.08       7000.00           में राधास्‍वामी राइस मिल नेवरा

                         7000.00           में सरदार दर्शन सिंह रायपुर (शेण्‍ड्री शांप नीलम हेतु जमा

                                             अमानत वापसी)

2     159/03.10.08       410.00             नागेश शुक्‍ला एण्‍ड ब्रर्दस

                          410.00             ताम्रध्‍वज साहू परसकोल

                           410.00             यूवर्स कंस्‍ट्रक्‍शन महासमुंद (ग्रेडिंग मशीन स्‍थापना हेतु

                                               जमा अमानत वापसी)

3   266/09.02.09         2000.00           श्‍याम पर बायलिंग युनिट 1 की प्रतिभूति वापस

 

14) अमानत (प्रतिभूति) जमा:-

 

 

कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग 2011-12 के अंकेक्षण में उपलब्‍ध कराये गये अभिलेखो के अवलोकनानुसार व्‍यापारी प्रतिभूति (अमानत) देना बैंक के खाता क्रमांक में दिनांक 31.03.2012 की स्थिति में राशि रु. 301340.90 जमा होना पाया गया ।

‘’रायपुर का वैभव’’ श्री महामाया देवी मंदिर-20 लेखक – पं. मनोज शुक्ला

                                index   चिकित्‍सालय

  1. सन् 1897 में पुलिस चिकित्‍सालय पुलिस लाइन में बनाया गया ।
  2. सन् 1897 – 98 में शा; कुष्‍ठ चिकित्‍सालय पंडरी में बनाया गया ।
  3. सन् 1923 – 24 में विश्‍व का पहला नेत्र शिविर छ.ग. के मुंगेली के मिशन अस्‍पताल में अमेरिका के डां रेम्‍बो ने लगाया था ।
  4. सन् 1936 में टी.बी. क्‍लीनिक कालीबाडी चौक में बनाया गया ।
  5. सन् 1944 में डी. के. हास्‍पीटल (दाऊ कल्‍याण सिंह द्धारा 1.25000 रु. दान सहयोग देने के कारण उन्‍ही के नाम से ) स्‍थापित किया गया । वर्तमान में स्‍वतंत्र छ.ग. राज्‍य बनने के बाद सन् 2000 में छ;ग. शासन का मंत्रालय व सचिवालय संचालित है ।
  6. सन् 1955 में टी.बी. हास्‍पीटल टाटीबंध में (दाऊ कल्‍याण सिंह द्धारा 323 एकड जमीन तथा एक लाख 50 हजार रु. दान) निर्माण किया गया ।
  7. सिल्‍वर जुबली अस्‍पताल – डी.के. हास्पिटल (वर्तमान मंत्रालय भवन के पीछे सी.एम.ओ. आंफिस से लगा यह अस्‍पताल जार्ज पंचम के शासन के 25 वर्ष पूरे होने की याद में बनाया गया था ।

                                     यातायात

  1. सन् 1856 में भारत देश में पहली बार रेलगाडी मुंबइ से ठाणे के मध्‍य शुरु हुआ था ।
  2. रायपुर नगर मुम्‍बइ – कलकत्‍ता महानगर को जोडने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 6 पर स्थित है । पहले यह मार्ग राजकुमार कांलेज के अंदर से लाखेनगर होते हुए पुरानीबस्‍ती थाना वाले रोड से बुढेश्‍वर चौक होकर पुलिस लाइन की ओर निकलता था बाद में सन् 1862 में रायपुर शहर के मध्‍य से जी.इ.रोड (ग्रेट इस्‍टर्न रोड) बनाया गया जो शहर को दो भागों में विभाजित करता है । रायपुर शहर से मुम्‍बइ 1139 कि.मी. तथा कलकत्‍ता 881 कि.मी. की दूरी पर है सडक मार्ग द्धारा रायपुर शहर. नागपुर. जबलपुर. संबलपुर तथा जगदलपुर से जुडा हुआ है । इसके अलावा रायपुर शहर पांच क्षेत्रीय शहरों दुर्ग. बिलासपुर. बलौदाबाजार. संबलपुर तथा धमतरी के मध्‍य में है. मार्गों का केन्‍द्र बिन्‍दु ‘’जय स्‍तम्‍भ चौक’’ है । इस तरह सन् 1854 तक रायपुर का अन्‍य क्षेत्रों से यातायात द्धारा संपर्क हो गया था ।
  3. सन् 1882 में छ.ग. में प्रथम रेल यातायात नागपुर से राजनांदगांव तक आरंभ हुआ ।
  4. सन् 1887 में रेल लाइन का विस्‍तार राजनांदगांव से रायपुर तक हुआ ।
  5. सन् 1888 में रायपुर का रेल्‍वे स्‍टेशन का निर्माण हुआ
  6. सन् 1889 में रेल लाइन का विस्‍तार रायपुर से बिलासपुर तक हुआ ।
  7. सन् 1890 में बिलासपुर का रेल्‍वे स्‍टेशन बना ।
  8. सन् 1891 में रेल लाइन का विस्‍तार बिलासपुर से आसनसोला तक बढाया गया ।
  9. सन् 1900 में इस रेल लाइन को आसनसोल से कलकत्‍ता तक बढाया गया ।
  10. सन् 1960 में राश्‍पुर में पहला रेल्‍वे ब्रिज बना ।

                                 अन्‍य

  1. सन् 1914 में आर्य समाज की स्‍थापना की गइ ।
  2. सन् 1918 में श्री महावीर गोशाला स्‍थापित की गइ ।
  3. सन् 1924 में बाल आश्रम (आनथालय) की स्‍थापना हुइ ।

                                 समाचार पत्रिका

  1. सन् 1900 में छत्‍तीसगढ मित्र नाम से मासिक पत्रिका प्रकाशित हुइ ।
  2. सन् 1906 में हिन्‍दु केशरी नाम से हिन्‍दी समाचार पत्र प्रकाशित हुआ ।
  3. सन् 1910 में राष्‍ट्रबंधु नाम से अर्धसाप्‍ताहिक पत्रिका प्रकाशित हुआ ।
  4. सन् 1935 से उत्‍थान नाम से मासिक पत्रिका प्रकाशित हुआ ।
  5. सन् 1942 से अग्रदुत नाम से साप्‍ताहिक पत्रिका प्रकाशित हुआ ।
  6. सन् 1946 में महाकौशल के नाम से साप्‍ताहिक पत्रिका हुआ ।
  7. सन् 1951 से महाकौशल (छ.ग. का प्रथम दैनिक समाचार पत्र) प्रकाशित हुआ ।
  8. सन् 1959 से नवभारत दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित हुआ ।
  9. सन् 1959 से नइदुनिया अब देशबंधु के नाम से नियमित है ।
  10. सन् 1961 से युगधर्म नाम की पत्रिका प्रकाशित हुआ ।
  11. सन् 1984 से अमृत संदेश नाम से दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित हुआ ।
  12. सन् 1988 से नवभास्‍कर अब दैनिक भास्‍कर के नाम से नियमित है ।
  13. सन् 1998 से हाइवे चैनल नाम से सांध्‍य दैनिक (देशबंधु द्धारा ही)

                               बैंक. पोस्‍टआफिस

  1. सन् 1912 में रायपुर जिले का सर्वप्रथम बैंक इलाहाबाद बैंक की शाखा स्‍थापित हुआ ।
  2. सन् 1913 में सहकारी केन्‍द्रीय बैंक की स्‍थापना हुइ ।
  3. सन् 1925 में इम्‍पीलियर बैंक आफ इंडिया के नाम से स्‍टेट बैंक द्धारा स्‍थापित की गइ ।
  4. सन् 1854 में अंग्रेजों ने रायपुर में डाक व्‍यवस्‍था की स्‍थापना की । डाक लाने ले जाने के लिए हरकारे व घोडों की व्‍यवस्‍था एक छोटा सा आफिस बनाकर एक अंग्रेज लेखक. मुस्‍तदी व चपरासी की नियुक्ति किया गया । एक स्‍टाम्‍प भी जारी किया गया. जिस पर इंग्‍लैंड की महारानी विक्‍टोरिया की फोटो अंकित था ।
  5. सन् 1856 में ब्रिटिश शासन द्धारा रायपुर में सर्वप्रथम डाकघर की स्‍थापना कर लेफिटनेन्‍ट स्थिम को प्रथम पोस्‍टरमास्‍टर नियुक्‍त किया गया ।

                                   ;जेल – न्‍यायालय

  1. सन् 1854 तक रायपुर का जेल एक छोटे से मकान में था ।
  2. सन् 1856 में छ.ग. के सोनाखान के जमीदार क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह को आम जनता के सामने फांसी में चढाया गया छ.ग. के इस प्रथम शहीद सेनानी के शहीद स्‍थल पर ही वर्तमान का जयस्‍तम्‍भ चौक बना हुआ है ।
  3. सन् 1858 की क्रांति और गदर में छ.ग. के कइ क्रांतिकारियों के जेल परिसर के विशाल इमली वृक्षों पर सार्वजनिक फांसी दी गइ थी ।
  4. सन् 1862 में तात्‍कालिक सेना गार्डों के स्‍थान पर पुलिस गार्ड रखकर डा. बेन्‍सले को रायपुर जेल का अधीक्षक नियुक्‍त किया गया ।
  5. सन् 1862 से 1868 के मध्‍य 78.42 एकड में जेल की नये भवन का निर्माण किया गया जिसमें भवन 18 एकड में सब्‍जी बाडी 26 एकड कृषि भूमि 14 एकड में तथा एक बडा तालाब 19 एकड में बनाया गया है ।
  6. सन् 1877 में रायपुर में मात्र 3 वकील थे ।
  7. सन् 1882 में रायपुर के अधिवक्‍ता संघ की स्‍थापना की गइ. जिसमें मात्र 5- 6 सदस्‍य थे (सागर वि.वि. के संस्‍थापक श्री हरीसिंह गौर. मध्‍य प्रान्‍त के अपर न्‍यायिक आयुक्‍त तथा म.प्र. के भूतपूर्व मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्‍ल भी अधिवक्‍ता संघ के सदस्‍य थे )
  8. सन् 1885 में रायपुर में एक मुन्सिफ न्‍यायालय की स्‍थापना की गइ ।

                           संदर्भित ग्रंथ

संकलित जानकारियों – तथ्‍यों के लिए संदर्भित ग्रंथों का साभार :

  1. ऋग्‍वेद 2. यजुवेद 3 सामदेव 4 अथर्ववेद

5 श्री मद भागवत महापुराण

  1. ब्रहमवैवर्त पुराण – गीताप्रेस गोरखपुर
  2. गरुड पुराण – गीताप्रेस गोरखपुर
  3. नारदपुराण – गीताप्रेस गोरखपुर
  4. अग्नि पुराण – गीताप्रेस गोरखपुर
  5. मार्कण्‍डेय पुराण – गीताप्रेस गोरखपुर
  6. महाभारत – गीताप्रेस गोरखपुर
  7. कल्‍याण – पुराण कथा अंक – गीताप्रेस गोरखपुर
  8. कल्‍याण वेद कथा अंक – गीताप्रेस गोरखपुर
  9. देवीमाला एंव राजोपचार पूजा विधान – पं. मनोज शुक्‍ला
  10. हैययवंश लेखक श्री पुत्‍तुलाल ‘’करुणेश’’
  11. प्राचीन छत्‍तीसगढ – डां प्‍यारेलाल गुप्‍त
  12. छत्‍तीसगढ का इतिहास – प्रो. रमेन्‍द्रनाथ मिश्र
  13. छ.ग. अग्रवाल जाति का इतिहास – डां चंद्रकुमार अग्रवाल
  14. खण्‍डहरों का वैभव – श्री कांति मुनि सागर
  15. श्री समलेश्‍वरी देवी संबलपुर (उडीसा) का इतिहास
  16. रायपुर डिस्ट्रिक्‍ट गजेटियर
  17. अतीत के पन्‍ने – न.पा.नि. रायपुर 2005
  18. आरंग दर्पण – श्री हरिशंकर धीवर
  19. श्री ताम्रकार उत्‍कर्ष दर्पण – कुंजीलाल ताम्रकार
  20. सरयू द्धिज – कुमारी दिव्‍या दुबे (शोधछात्रा)
  21. भाग्‍योदक बोध – मधुसूदन शर्मा
  22. छत्‍तीसगढ टुडे
  23. देशबंधु प्रेस लायब्रेरी
  24. नेशनल लुक दैनिक समाचार पत्र

                               सहयोगकर्ता

  1. श्रीमती चन्‍द्रावाली शुक्‍ला – रायपुर
  2. श्रीमती कविता शुक्‍ला – रायपुर
  3. श्रीमती ज्‍योति – चन्‍द्रशेखर शुक्‍ला - रायपुर
  4. श्रीमती श्रद्धा – चन्‍द्रभूषण शुक्‍ला - रायपुर
  5. श्रीमती ममता – प्रतीक पाण्‍डेय – रायपुर
  6. श्रीमती राधिका – विक्रांत शर्मा – रायपुर
  7. श्री राजेश कुमार शुक्‍ला -संवाददाता – न्‍यूज चैनल
  8. आचार्य श्री रमेन्‍द्रनाथ मिश्रा जी – साहित्‍यकार
  9. प्रो. ए.के. केशरवानी – इतिहासकार साहित्‍यकार
  10. डां. हेमु यदु – पुरातत्‍व विद्
  11. डां टी. आर. रामटेके – शोधकर्ता
  12. डां. सुखदेव राम साहू ‘सरस’- साहित्‍यकार
  13. श्री सुशील यदु – साहित्‍यकार
  14. श्री सुदामा ताम्रकार ‘’श्रान्‍त’’ – इतिहासकार. साहित्‍यकार
  15. श्रीमती भारती – अजय दुबे – भिलाइ
  16. श्रीमती आरती कैलाश धर दीवान – भिलाइ
  17. श्री नवीन कुमार श्रीवास्‍तव – रायपुर
  18. श्री पंकज झा – रायपुर
  19. श्री मारुति गुप्‍ता – रायपुर
  20. श्री तुलसी राम वर्मा – रायपुर
  21. श्री देवेन्‍द्र सिंह – रायपुर
  22. श्री कमल अग्रवाल – रायपुर
  23. श्री विपिन शर्मा – रायपुर
  24. श्री प्रमोद शुक्‍ला – रायपुर
  25. श्री गोपाल उत्‍तमानी – रायपुर
  26. श्री किशोर माधवानी – रायपुर
  27. श्री रामस्‍वरुप संजय अजय अग्रवाल – रायपुर
  28. श्री राजेश अडियेचा – रायपुर
  29. श्री राजा भैया – रायपुर
  30. श्री मुकेश यदु – श्री महामाया साइन्टिफिक केन्‍द्र रायपुर
  31. श्री अमीत पाण्‍डेय – रायपुर
  32. श्री राकेश पाण्‍डेय – बालाघाट
  33. श्रीमती अर्चना – संजना शर्मा – रायपुर
  34. श्री शंकर पंसारी – सदस्‍य छ.ग. पर्यटन मंडल – रायपुर
  35. श्रीमती उषाकिरण – शिवशंकर भट्ट – रायपुर
  36. श्री समीर भट्ट कुमारी स्‍वाती भट्ट – रायपुर
  37. श्री मगन लाल अग्रवाल – रायपुर

‘’रायपुर का वैभव’’ श्री महामाया देवी मंदिर-18 लेखक – पं. मनोज शुक्ला

CM‘’श्री दक्षिणमुखी काली मंदिर रावणभाठा’’

सन् 1991 में रावणभाठा रायपुर के दक्षिण मुखी काली माता के मंदिर की स्‍थापना की गइ थी तथा सन् 1994 में मातेश्‍वरी के बृहत श्रीविग्रह कर मंदिर का विस्‍तार किया गया ।

                             ‘’श्री संकट मोचन हनुमान राठौर चौक’’

प्रसिद्ध श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर राठौर चौक की स्‍थापना सन) 1992 में पं. घनश्‍याम तिवारी व कुमार साहु आदि ने जन सहयोग से कराया था सन् 2004 की हनुमान जंयती के दिन महाआरती के पश्‍चात् हनुमान जी को 1111 किलों लडडु का भोग लगाया गाया था ।

                         ‘’श्री विश्‍वकर्मा मंदिर’’

श्री ब्रम्‍हा जी के नाती तथा वास्‍तुदेव के पुत्र. देवताओं के शिल्‍पी श्री विश्‍वकर्मा जी के मंदिर का निर्माण मोहबा बाजार में सन् 1994 में किया गया था ।

                             ‘’ श्री इस्‍कान मंदिर टाटीबंध’’

श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर (इस्‍कान) हरे कृष्‍ण धाम का निर्माण टाटीबंध में सन् 2001 में किया गया था । यहां जन्‍माष्‍टमी तिथि को भगवान का जन्‍मोत्‍सव बडे धूमधाम से कइ दिनों तक मनाया जाता है ।

                           ‘’ श्री सिद्धेश्‍वरी मंदिर’’

मां सिद्धेश्‍वरी मंदिर का निर्माण राधा स्‍वामी नगर रिग रोड भाठागांव चौक‍ में सन् 2003 में कराया गया है ।यहां माता जी का श्री विग्रह अष्‍टभुजी मानवाकार कृष्‍ण वर्ण में बहुत ही भव्‍य एवं दिव्‍य है एवं मनोहर मनमोहक स्‍वरुप में विराजित है ।

                              ‘’श्री जगन्‍नाथ मंदिर गायत्रीनगर’’

स्‍वामी श्री जगन्‍नाथ जी के इस मंदिर का निर्माण सन् 2003 में किया गया है । लगभग 33.000 वर्गफीट भूमि पर लगभग डेढ करोड रु. की लागत से 81 फीट ऊंचा भव्‍य मंदिर का निर्माण कराया गया है । यहां के प्रधान श्री विग्रह ( काष्‍ठ मूर्ति) को जगन्‍नाथ पुरी उडीसा से मंगाया गया है ।रथयात्रा पर्व पर छत्‍तीसगढ के महामहिम राज्‍यपाल व माननीय मुख्‍यमंत्री एवं मंत्रीगणों द्धारा छेरा –पहेरा करते हुए भगवान की रथयात्रा निकाली जाती है                              

                               ‘’श्री कामाख्‍या देवी मंदिर’’

देवेन्‍द्र नगर मुक्तिधाम के आगे फोकटपारा में मां कामाख्‍या देवी की प्रतिष्‍ठा सन् 2003 में की गइ है । यहां के सेवक श्री हिरेन्‍द्र विश्‍वकर्मा के अनुसार मातेश्‍वरी की सेवापूजा कामरुप कामाख्‍या (गुवाहाटी – असम) में प्रतिष्ठित मूल मंदिर में होने वाले समस्‍त नियमों का पालन करते हुए किया जाता है अबुंवाची योग में चार दिन के लिए मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है । चार दिन बाद आंखों पर पट्टी बांधकर मातेश्‍वरी का पुन:श्रृंगार किया जाता है रायपुर ही नहीं वरन् पुरे छत्‍तीसगढ में मातेश्‍वरी कामाख्‍या का यह मात्र एक मंदिर है ।

                               ‘’श्री पीताम्‍बरा देवी मंदिर’’

सिद्ध श्री पीताम्‍बरा देवी मंदिर का निर्माण महादेव घाट मंदिर रायपुरा (एनीकेट के पास) नदी के उस पार अम्‍लेश्‍वर क्षेत्र में सन् 2005 में जबलपुर पीठ के श्री श्री युधिष्ठिर जी महाराज के द्धारा कराया गया है ।

                            ‘’ श्री राज राजेश्‍वरी त्रिपुर सुन्‍दरी मंदिर’’

सन् 2006 में बोरिया कला स्थित शंकराचार्य आश्रम में अनन्‍त श्री विभूषित ज्‍योतिष पीठाधीश्‍वर एवं द्धारका – शारदा पीठाधीश्‍वर जगदगुरु शंकराचार्य स्‍वामी श्री स्‍वरुपानंद सरस्‍वती जी महाराज के पुण्‍य मय आहवान पर श्री राजराजेश्‍वरी ललिता प्रेमाम्‍बा त्रिपुर सुन्‍दरी के दिव्‍य साधान केन्‍द्र की स्‍थापना की गइ । इस दिव्‍य साधना केन्‍द्र में प्रतिष्ठित मातेश्‍वरी की श्रीविग्रह स्‍फटिक मणि में निर्मित विश्‍व की एक मात्र भव्‍य प्रतिमा है । इस दुर्लभ श्री विग्रह के निर्माण के लिए हिमालय की तराइ से विशाल स्‍फटिक मणि मंगाइ गइ लगभग दो किंवटल वजनी इस विशाल मणि गुजरात के खम्‍भात शहर के कुशल करीगरों ने जगदगुरु के निर्देशनुसार शास्‍त्र सम्‍मत विधान से तराश कर मनोहरी स्‍वरुप प्रदान किया है ।

अन्‍य प्रसिद्ध मंदिर –

हनुमान मंदिर बुढापारा.शेरावाली मंदिर बुढापारा.हनुमान मंदिर बंढातालाब.बंजारी मंदिर यूनिवर्सिटी.दुर्गा मंदिर नयापारा.सर्वधर्म हनुमान मंदिर रेल्‍वे स्‍टेशन.गणेश मंदिर अग्रसेन चौक. महरी माता मंदिर एस्‍कार्ट हांस्‍पीटल चौक.सरोना शिव मंदिर. साइ मंदिर देवेन्‍द्र नगर. साइ मंदिर रायपुरा. साइ मंदिर आजाद चौक. शीतला माता मंदिर आमापारा. राधाकृष्‍ण मंदिर समता कालोनी. शीतला माता मंदिर डंगनिया. हरदेवलाल मंदिर टिकरापारा आदि ।

‘’रायपुर का वैभव’’ श्री महामाया देवी मंदिर-19 लेखक – पं. मनोज शुक्ला

CMT

                     रायपुर नगर के अन्‍य ऐतिहासिक वैभव

निर्मित सन् के क्रम में ........

सन्) 1790 में ‘’लेकी’’ नामक एक अंग्रेज प्रवास के दौरान रायपुर आया था. उन्‍होनें अपने लेख में लिखा है कि रायपुर एक बडा शहर है. जहां बडी संख्‍या में व्‍यापारी और धनिकगण निवास करते हैं । यहां एक किला है जिसके नीचे का भाग पत्‍थर का है तथा ऊपर का निर्माण मिट्टी से किया गया है इस किले के पास सुन्‍दर सरोवर है. लेकिन उसका जल अच्‍छा नहीं है । इस तरह ‘’लेकी’’ द्धारा रायपुर के शहर के बारे में लिखे हुए लेख से प्रभावित तथा शहर की महत्‍ता को ध्‍यान में रख कर ही ब्रिटिश अधीक्षक मि. एगन्‍यु ने रतनपुर के बजाय रायपुर को राजधानी बनाने का निश्‍चय कर तदानुसार कार्य किया । सन् 1818 में रायपुर को ब्रिटिश अधीक्षक का मुख्‍यालय तथा छ.ग. ब्रिटिश शासन की राजधानी बनाया ।

2. सन् 1854 को छत्‍तीसगढ में स्‍वतंत्र ब्रिटिश की स्‍थापना हुइ । नागपुर को मुख्‍यालय रखा गया तथा कैप्‍टन एडमंड को छ.ग. का प्रथम अधीक्षक नियुक्‍त किया गया ।

3. सन् 1860 तक ब्रिटिश शासको द्धारा रायपुर को भी एक प्रमुख नगर के रुप में देखा जाने लगा ।

4. सन् 1861 में ब्रिटिश शासकों द्धारा मध्‍य प्रान्‍त का गठन किया गया जिसमें नागपुर (मुख्‍यालय). चांदा. छिंदवाडा. रायपुर बस्‍तर. सागर. दमोह. मंडला. जबलपुर. सिवनी. बैतुल. नरसिंहपुर तथा होसंगाबाद आदि थे ।

5. सन् 1862 में छ.ग. को संभाग बनाकर रायपुर बिलासपुर तथा संबलपुर जिला बनाया गया. इन सबका मुख्‍यालय रायपुर था ।

6. सन् 1885 में अखिल भारतीय कांग्रेस की स्‍थापना हुइ सर ए.ओ. ह्ययूमरोज इनके संस्‍थापक थे ।

7. सन् 1905 में संबलपुर सहित कालाहाण्‍डी. पटना आदि पांच रियासतों को मध्‍य प्रान्‍त से बंगाल प्रान्‍त में तथा बंगाल प्रान्‍त में शामिल किया गया ।

8. सन् 1919 में पं. रविशंकर शुक्‍ल कांग्रेस कामेटी के प्रमुख सदस्‍य बने ।

9. सन् 1920 में महात्‍मा गांधी प्रथम बार रायपुर आये ।

10. सन् 1936 में मध्‍यप्रान्‍त के चुनाव में पं. रविशंकर शुक्‍ल जी का प्रथम बार मुख्‍यमंत्री बने

11. सन् 1939 – 40 में परसराम सोनी ने स्‍वनिर्मित बम – बारुद का प्रथम परीक्षण रावणभाठा के मैदान में तथा टाइम बम का परीक्षण इदगाह भाठा के मैदान में किया था ।

11. सन् 1947 में अंग्रेजों द्धारा भारत छोडकर जाने की खुशी में रायपुर के हर घर में दीपक जलाकर रात भर रोशनी की गइ फटाखे फोडकर मिठाइ बांटा गाया था ।    

12. सन् 1956 को मध्‍य प्रान्‍त से पृथक मध्‍यप्रदेश का गठन किया गया ।

13. सन् 2000 के मध्‍यप्रदेश के 16 जिलों को लेकर भारत देश के 26 वें राज्‍य के रुप में छ.ग. राज्‍य का गठन किया गया. राजधानी रायपुर. प्रथम राज्‍यपाल महामहिम श्री दिनेश नन्‍दन सहाय तथा प्रथम मुख्‍यमंत्री श्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी थे ।

                               ।। स्‍कूल ।।

  1. सन् 1886 में शास­. बहुउददेशीय उच्‍च. माध्‍य. शाला का आरंभ पूर्व. माध्‍यमिक शाला के रुप में किया गया था ।
  2. सन् 1994 में राजकुमार कालेज की स्‍थापना राजकुमारों के लिए स्‍कूल के रुप में किया गया था । सन् 1939 से इसे पब्लिक स्‍कूल का रुप दिया गया ।
  3. सन् 1907 में सालेम कन्‍या शाला शुरु हुआ ।
  4. सन् 1911 से सेन्‍टपाल उच्‍च. माध्‍य. शाला आरंभ हुआ ।
  5. सन् 1913 में श्री माधवराव सप्रे न.पा.उ.मा शाला आरंभ हुआ ।
  6. सन् 1919 में श्री रामचन्‍द्र संस्‍कृत पाठशाला आरंभ हुआ ।
  7. सन् 1921 में राष्‍ट्रीय उ.मा. शाला की स्‍थापना की गइ ।
  8. सन् 1931 में हिन्‍दु हाइस्‍कूल आरंभ हुआ ।
  9. सन् 1932 में कालीबाडी स्‍कूल खोला गया ।
  10. सन् 1933 में नवीन सरस्‍वती कन्‍या शाला के नाम से सर्व प्रथम कन्‍या शाला लोहार चौक पुरानी बस्‍ती में शुरु किया गया ।
  11. सन् 1949 में जे.आर. दानी (जगन्‍नाथ राव दानी) शा. कन्‍या बहुउददेशीय उ.मा. शाला आरंभ हुआ ।
  12. सन् 1959 में पं. रामदयाल तिवारी स्‍कूल आमापारा में आरंभ किया गया ।
  13. सन् 1959 में गंज पूर्व माध्‍यमिक शाला के नाम से गुरुनानक चौक में आरंभ करके सन् 1968 में स्‍वामी विवेकानंद के जन्‍म शताब्‍दी के अवसर पर उन्‍हीं की शिष्‍या भगिनी निवेदिता के नाम पर इस स्‍कूल का नामकरण किया गया ।
  14. सन् 1962 में राजातालाब क्षेत्र में बद्रीप्रसाद पुजारी उ.मा; शाला आरंभ हुआ ।

                             ।। कालेज ।।

1. सन् 1936 में श्री राम – संगीत महाविद्यालय (सर्व प्रथम अग्रणी संस्‍था) की स्‍थापना हुइ ।

2. सन् 1938 में छत्‍तीसगढ महाविद्यालय की स्‍थापना जनस्‍वामी योगानन्‍दम द्धारा किया गया ।

3; सन् 1948 में शास. विज्ञान महाविद्यालय शुरु किया गया ।

  1. सन् 1950 में भातखण्‍डे ललित कला शिक्षण समिति स्‍थापित हुआ।
  2. सन् 1950 में कमला देवी संगीत महाविद्यालय की स्‍थापना की गइ ।
  3. सन् 1950 में शास. आयुर्वेदिक महाविद्यालय को स्‍कूल के रुप में आरम्‍भ करके सन् 1965 में इसे महाविद्यालय बनाया गया ।
  4. सन् 1951 में दुर्गा महाविद्यालय आरंभ हुआ. सन् 1962 सं पूर्व इसका नाम नूतन कला तथा वाणिज्‍य महाविद्यालय था ।
  5. सन् 1955 में दुधाधारी मठ के महंत स्‍वामी श्री वैष्‍णव दास जी ने रायपुर में संस्‍कृत महाविद्यालय स्‍थापित करने के लिए स्‍वयं के जमीन में भवन निर्माण कराने के उपरांत नगद तीन लाख रु. व पलारी के निकट छोकरपुर नामक गांव में 100 एकड जमीन भी दान किये थे वर्तमान में शासकीय दुधाधारी गजरंग संस्‍कृत महाविद्यालय उसी स्‍थान पर संचालित है ।
  6. सन् 1956 में होम्‍योपैथिक तथा बायोकेमिक महाविद्यालय शुरु हुआ ।
  7. सन् 1956 में इस द्धीप ‘’एशिया महाद्धीप’’ का सर्वप्रथम विश्‍वविद्यालय कला व संगीत के क्षेत्र में खैरागढ में आरंभ हुआ ।
  8. सन् 1956 में शास. इंजीनियरिग तथा प्रौद्योगिक महाविद्यालय ( सन् 1963 में स्‍वयं के भवन में) आरंभ हुआ ।
  9. सन् 1956 में शास. स्‍नातकोत्‍तर बुनियादी प्रशिक्षण महाविद्यालय आरंभ हुआ ।
  10. सन् 1958 में दुधाधारी मठ के महंत स्‍वामी श्री वैष्‍णव दास जी ने रायपुर के कन्‍या महाविद्यालय के लिए स्‍वयं की जमीन में भवन बनाकर तथा संचालन की व्‍यवस्‍था के लिए 300 एकड जमीन भाठापारा के ग्राम पेण्‍ड्री में दान दिये थे ।
  11. सन् 1960 में महाकौशल ललित कला महाविद्यालय शुरु हुआ ।
  12. सन् 1961 में कृषि महाविद्यालय 1729 एकड जमीन में (यह जमीन स्‍व. दाऊ कल्‍याण सिंह की पत्‍नी द्धारा दान में दिया गया था)
  13. सन् 1963 में पं. जवाहर लाल नेहरु स्‍मृति चिकित्‍सा महाविद्यालय की स्‍थापना हुइ ।
  14. सन् 1964 में पं. रविशंकर विश्‍वविद्यालय 202 एकड जमीन में स्‍थापित किया गया ।

                           आकाशवाणी. दूरदर्शन. बिजलीघर

1.सन् 1951 में रायपुर के गुढियारी क्षेत्र में 9 मेगावाट के थर्मल पावर संयंत्र की सर्वप्रथम स्‍थापना की गइ ।

2. सन् 1960 में कोरबा व भिलाइ में पावर स्‍टेशन बनाया गया ।

3. सन् 1963 में आकाशवाणी केन्‍द्र रांवाभाठा रायपुर में स्‍थापित किया गया ।

4. सन् 1972 में दूरदर्शन रिले स्‍टेशन की स्‍थापना की गइ ।

5. सन् 1977 में आकाशवाणी का ब्राड कास्टिंग. ग्रास मेमोरियल के सामने स्‍थापित किया गया ।

                                   ग्रंथालय – पुस्‍तकालय

  1. सन् 1975 में महन्‍त घासीदास स्‍मारक संग्रहालय की स्‍थापना की गइ ।
  2. सन् 1908 में आनन्‍द समाज पुस्‍तकालय की स्‍थापना की गइ ।
  3. सन् 1910 में बालसमाज पुस्‍तकालय की स्‍थापना की गइ ।
  4. सन् 1914 में ग्रास मेमोरियल लाइब्रेरी आरंभ हुआ ।
  5. सन् 1945 में देशबंधु संघ पुस्‍तकालय की स्‍थापना हुइ ।
  6. सन् 1953 मेंमहन्‍तघासीदासस्‍मारक संग्रहालय को आर्थिक सहयोग देकर महन्‍त सर्वेश्‍वर दास ग्रंथालय का नाम दिया गया ।
  7. सन् 1956 में श्री रामकृष्‍ण सेवा समिति (विवेकानंद आश्रम) बना ।

                         नगर पालिका – नगर निगम

  1. सन् 1967 में ब्रिटिश शासन द्धारा रायपुर में नगरपालिका गठित कर क्षेत्र को वार्डों में विभक्‍त किया गया. जिसे रायपुर म्‍यूनिसिपल कमेटी का नाम दिया गया । प्रांरभिक समय में इसका संचालन जिले के डिप्‍टी कमिश्‍नर द्धारा किया जाता था बाद में नगर के प्रबुद्ध नागरिकों को भी मनोनित किया जाने लगा । सन् 1937 में ठाकुर प्‍यारेलाल सिंह सर्वप्रथम निर्वाचित अध्‍यक्ष हुए ।
  2. सन् 1892 में खारुन नदी भांटागांव रायपुर में जल आपूर्ति गृह का निर्माण (नांदगांव के राजा बहादुर बलरामदास के आर्थिक सहयोग से रायपुर के संभाग आयुक्‍त कर्नर एम.एम. धोधी ने) कराया तथा वर्तमान छोटापारा में आठ लाख गेलन क्षमता की भूमिगत टंकी बनाकर खारुन नदी से पाइप लाइन द्धारा जोडकर बांयलर चलित पंप के माध्‍यम से आपूर्ति की जाती थी सन् 1951 में रावणभाठा में जल शुद्धिकरण यंत्र बनाकर खारुन नदी तक जोडा गया ।
  3. सन् 1930 गुढियारी क्षेत्र को व्‍यवसायिक केन्‍द्र के रुप में विकसित किया गया ।
  4. सन् 1962 में मध्‍यप्रदेश पंचायत अधिनियम तथा सन् 1770 में जनपद पंचायत अधिनियम पारित किया गया ।
  5. सन् 1967 में तेलीबांधा. टिकरापारा. गुढियारी व कुशालपुर में अवास गृह निर्माण तथा शहर के मध्‍य राजकमल टाकिज (वर्तमान राज टाकिज के सामने नया बम्‍बइ बाजार बनवाया गया ।
  6. सन् 1967 में नगरपालिका परिषद का क्रमोन्‍नत कर नगर पालिका निगम बनवाया गया ।
  7. मोतीबाग रायपुर शहर के सबसे पुराना गार्डन है जो पहले विक्‍टोरिया गार्डन के नाम से था जो 50 एकड में फैला हुआ है । जार्ज पंचम के शासन के 25 वर्ष पुरे होने पर यादगार के रुप में बनाये जाने के कारण इसको सिल्‍वर जुबली पार्क के नाम से भी जाना जाता था ।
  8. बुढातालाब शहर के सबसे पुराना तालाब है ।
  9. महाराज बंद तालाब का निर्माण लगभग 100 एकड में महाराजा साव दानी द्धारा कराया गया था ।
  10. विक्‍टोरिया जुबली टाऊन हाल ( वर्तमान कलेक्‍टर कार्यालय परिसर) के निर्माण की आधारशीला सन् 1887 में मध्‍यप्रांत बरार के चीफ कमिश्‍नर ए.मेकेन्‍जी स्‍क्‍वेयर ने रखा था तथा उदघाटन सन् 1890 में हुआ । इंग्‍लैण्‍ड की महारानी विक्‍टोरिया की जयंती स्‍मृति में छ.ग. के क्षेत्रीय जनता के अंशदान द्धारा इसे बनवाया गया था जिसमें रायपुर डिस्ट्रिक्‍ट काउन्सिल. रायपुर म्‍युनिसिपल कमेटी महाराजा बलराम दास राजनांदगांव. महाराजा कन्‍हैया लाल खैरागढ. महाराजाधिराज नरहरदेव कांकेर. महंत लक्ष्‍मण दास महाराजा छुइखदान. जयपाल सिंह डौडी लोहारा तथा ठाकुर थानसिंह जमींदार गुण्‍डरदेही प्रमुख थे । अंग्रेजों के शासन काल में इस भवन का उपयोग प्रशासनिक बैठक व सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों के लिए. स्‍वतंत्रता के बाद कुछ समय तक प्रशासनिक कार्यों के लिए. 10 – 12 वर्षों तक बोर्ड परीक्षओं के लिए. कुछ समय तक न्‍यायालय के रुप में सन् 1964 से 1992 तक कृषि विभाग के कार्यालय के रुप में इस भवन का उपयोग होता रहा । वर्तमान में यह भवन नगर पालिका निगम रायपुर कर संपत्ति है ।
  11. इंग्‍लैंड की महारानी विक्‍टोरिया की याद में पुराने नगर पालिका निगम भवन के बाजू में ‘’केशर- ए –हिन्‍द नाम से विशाल गेट का निर्माण सन् 1877 में किया गया था. जो वर्तमान में रविभवन के प्रवेश द्धार के रुप में प्रयोग किया जा रहा है । इस गेट के तात्‍कालिक निर्माण के सहयोग में अग्रवाल परिवार के जैतुसाव (जैतुसाव मंदिर के निर्माणकर्ता) तथा पीला साव आदि ने दान किया था ।

‘’रायपुर का वैभव’’ श्री महामाया देवी मंदिर-17 लेखक – पं. मनोज शुक्ला

CM‘’ श्री जैतुसाव मठ’’

सन् 1884 में पुरानी बस्‍ती में श्रीराम जानकी मंदिर का निर्माण स्‍व. जैतुसाव अग्रवाल की स्‍मृति में उनकी धर्मपत्‍नी श्रीमती उमाबाइ ने बनवाया था । जॅतुसाव अग्रवाल के नाम से उमाबाइ ने बनवाया था । जॅतुसाव अग्रवाल के नाम पर ही इस मंदिर का नाम जैतुसाव मठ पडा सहां के महन्‍तों में श्री बिहारीदास जी महन्‍त लक्ष्‍मीनारायण दास जी महन्‍त रामभुषण दास जी वर्तमान में सन् 2010 के संरक्षक दुधाधारी के महन्‍त राजे श्री रामसुन्‍दर दास जी हैं ।

                        ‘’श्री लक्ष्‍मी नारायण रामकुण्‍ड’’

सन् 1890 में श्री लक्ष्‍मी नारायण स्‍वामी के इस मंदिर का निर्माण ठाकुर अर्जुन सिंग ने स्‍वामी बलदेव दास जी महाराज के सानिध्‍य व मार्गदर्शन में आमातालाब (इस तालाब को गोयल गोत्रीय अग्रवाल परिवार के श्री जगन्‍नाथ साव ने खुदवाया था तथा तालाब के पार में चारों दिशाओं में चार मंदिर का निर्माण करवाया था) के पास कराया था । महंत स्‍वामी बलदेव दास बहुत ही सिद्ध व साधक थे । महाराज जी स्‍वंय इस मंदिर के संस्‍थापक महंत थे उनकी जीवित समाधी इस मंदिर में विद्यमान है ।

                                 ‘’श्री बंजारी माता मंदिर गोलबाजार’’

सन् 1895 में पहले से स्‍थापित बंजारी माता गोलबाजार वाले की स्‍थापना गेरु बेचने वाले बंजारों ने किया था । पूर्वमूखी प्रतिष्ठित माता बंजारी महालक्ष्‍मी स्‍वरुपा है । इस मंदिर के प्रति अनेक ब्रिटिश अफसरों की व्‍यवस्‍था जुडी हुइ थी । उन्‍होंने तात्‍कालिक रायपुर के नक्‍शे में इस मंदिर को चिन्हित कर गजेटियर में उल्‍लेख किया था । इस मंदिर के प्रथम पुजारी सेवक के रुप में श्री रामानंद स्‍वामी सेवा करते थे । वर्तमान पुजारी 45 वर्षीय पं. गणपत पाण्‍डेय बाल्‍यावस्‍था से ही यहां पूजा कर रहे हैं ।

                                  ‘’श्री अम्‍बा देवी मंदिर’’

सत्‍ती बाजार में प्रतिष्ठित सिंह वाहिनी मातेश्‍वरी अम्‍बा देवी के मंदिर का निर्माण शाकद्धिपीय ब्राह्ममण समाज द्धारा किया गया है । समिति के अध्‍यक्ष दिलीप शर्मा ने बताया कि सन् 1909 में मंदिर निर्माण के उद्देश्‍य से भुमि खरीदा गया था । सन् 1921 में मंदिर बन कर तैयार हुआ सन् 1922 में मातेश्‍वरी के विग्रह की प्रतिष्‍ठा की गइ । इस परिसर में शारदीय नवरात्रि पर्व पर रास – गरबा – डंडिया का आद्धितीय अयोजना किया गया है ।

                                 ‘’श्री जगन्‍नाथ मंदिर सदर बाजार’’

श्री जगन्‍नाथ मंदिर सदर बाजार का निर्माण (मुख्‍य द्धार में अंकित) संवत् 1986 सन् 1929 में हुआ है । आठ दशक पूर्व से ही प्रतिष्ठित इस मंदिर में सदर बाजार का सराफा व्‍यवसायी तथा आसपास के निवासी इस मंदिर में आकर महाप्रभू के सामने शीश नवांकर ही अपनी दिनचर्या आरंभ करते थे । जगन्‍नाथपुरी के राजवंश से संबंद्ध अनेक भक्‍त भी इस मंदिर में आ चुके हैं ।

                               ‘’श्री सत्‍यनारायण मंदिर ब्राह्ममण पारा’’

ब्राहमण पारा में प्रतिष्ठित नगर के अद्धितीय श्री सत्‍यनारायण स्‍वामी के मंदिर का निर्माण सन् 1932 में श्री बेनीराम सोनी द्धारा कराया गया था । उनके बाद इस मंदिर की देखरेख व्‍यवस्‍था सोहागा मंदिर के महंत श्री रामचरण दास के द्धारा संचालित होने लगा तथा पुजारी के रुप में श्री देवी प्रसाद मिश्रा को नियुक्ति किया गया । वर्तमान में इस मंदिर की व्‍यवस्‍था ट्रस्‍ट बनाकर तथा पुजारी के रुप में पं. दुष्‍यंत तिवारी जी सेवारत रहे हैं ।

                                ‘’श्री सोहागा मंदिर’’

सन् 1935 में ब्राह्मण पारा में श्री राधाकृष्‍ण के श्री विग्रह वाले इस मंदिर का निर्माण रैता(धरसीवा) के माल गुजार पं. मनोहर लाल तिवारी ने कराया था । नि:संतान होने के कारण श्री तिवारी जी की धर्म पत्‍नी श्रीमती सोहागा देवी द्धारा श्री राधेकृष्‍ण की पूजा सेवा में ही अपना पूरा समय व्‍यतीत किये जाने के कारण उन्‍हीं के नाम पर इस मंदिर का सोहागा मंदिर के नाम से जाना जाने लगा ।

                               ‘’श्री काली मंदिर आकाशवाणी चौक’’

सन् 1950 के आस – पास बंगाल के कुछ नागा साधुओं द्धारा गास मेमोरियल मैदान के पास अखाडा लगाकर लम्‍बे समय तक सिद्धि साधना किया जाता रहा । जाते – जाते उनके द्धारा उस स्‍थान को सिद्ध तथा पवित्र बताने पर बैरन बाजार के पाण्‍डे गुरुजी द्धारा काली माता की श्री विग्रह प्रतिष्ठित कर पूजा – अर्चना किया जाने लगा । बहुत समय बाद में श्रद्धालु लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण किया गय. जिसे वर्तमान में आकाशवाणी काली मंदिर के नाम से से प्रसिद्ध है । सन् 1993 में काली मंदिर से ही लगा हुआ शिव मंदिर का निर्माण कराया गया तथा कुछ समय पश्‍चात् भैरव मंदिर का भी निर्माण किया गया ।

                               ‘’श्री बंजारी मंदिर रावांभाठा’’

15 वीं शताब्‍दी में छोकरा नाला के पास एक खेत से प्राप्‍त श्री विग्रह की स्‍थापना रायपुर शहर के बाहर बिलासपुर रोड में किया गया था. जो वर्तमान में प्रसिद्ध बंजारी माता मंदिर रावांभाठा के नाम से प्रसिद्ध है । सन् 1963 में आकाशवाणी केन्‍द्र की स्‍थापना के समय यहां टावर गडाने के काम में लगे हुए मजदुरों को ही कुछ महनताना देकर प्रतिष्ठित मातेश्‍वरी के श्री विग्रह को ढकने के लिए छोटा सा पठेरा नुमा सुरक्षा घेरा बनवाया गया था । ऐ भक्‍त हरीशभाइ के द्धारा सन् 1987 में मातेश्‍वरी के मंदिर का विस्‍तार करते हुए सन् 1989 में में तीन तल पर भगवान शिव. सन् 1991 में हनुमान जी वाले तीन तल का मंदिर सन् 1992 में गोशाला. सन् 2000 में व्‍यायाम शाला व भोजन शाला तथा 2003 में पाठशाला का निर्माण किया गया है ।

                               ‘’संत श्री गाजनन जी महाराज’’

तात्‍यापारा चौक के हनुमान मंदिर वाली गली में प्रतिष्ठित शेगांव महाराष्‍ट्र के संत. सिद्धयोगी श्री गजानन महाराज जी की आदमकद संगमरमर की मूर्ति की स्‍थापना सन् 1969 में किया गया था संत श्री के इस आकमकद प्रतीमा का निर्माण नागपुर में किया गया था । पं. विवेक शास्‍त्री ‘’अमीन’’ इस मंदिर के आजीवन सदस्‍य है इनके द्धारा यह जानकारी दी गइ कि मंदिर निर्माण के समय से ही एक कमेटी बनाकर इस मंदिर की देखरेख व्‍यवस्‍था की जा रही है ।

                                   ‘’श्री सतबहिनियां माता मंदिर’’

सन् 1971 में पुरानी बस्‍ती के बंधवा पारा में सतबहिनियां माता का मंदिर यादव समाज के द्धारा स्‍थापित किया गया । जहां पर छोटे दुधमुहे बच्‍चे के अधीक रोने पर चुडी पाट (छोटी काली चुडी) श्रद्धापूर्वक अर्पित कर देने से बच्‍चा स्‍वस्‍थ हो जाता है

                                   ‘’श्री बरइ मंदिर’’

श्री लक्ष्‍मी नारायण जी के इस श्री विग्रह वाले मंदिर का निर्माण लीली चौक पुरानी बस्‍ती में तंबोली(बरइ) परिवार द्धारा सन् 1942 – 45 के आसपास तथा परिसर व द्धार सन् 1980(मुख्‍य द्धार पर अंकित) में कराया गया था । बरइ परिवार के द्धारा निर्मित होने के कारण इस मंदिर को बरइ मंदिर के नाम से जानाजाता है ।

                          ‘’श्री गायत्री मंदिर समता कांलोनी’’

सन् 1886 में शहर के श्रद्धावान लोगों द्धारा एक समिति बनाकर आमजनों के सहयोग से समता कालोनी क्षेत्र में मंदिर निर्माण कर माता गायत्री की सविधि प्राण प्रति‍ष्‍ठा कराया गया । इस मंदिर में मातेश्‍वरी की प्राण प्रति‍ष्‍ठा से आज पर्यन्‍त नित्‍य प्रतिदिन पूजन के बाद यज्ञ किया जाता है । यज्ञशाला निर्माण के पूर्व एक निश्चित स्‍थान पर यज्ञ किया जाता था सन् 1988 में यज्ञ स्‍थल का निर्माण किया गया. तब से आज तक अनवरत यज्ञ स्‍थल में यज्ञ तथा अखण्‍ड दीप भी प्रज्‍जवलित है । जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक के जितने संस्‍कार सुनिश्चित है उसमें से कुछे को छोडकर प्राय: सभी संस्‍कार वैदिक विधि विधान से संपन्‍न करके एक संस्‍कारित समाज का निर्माण करना ही इस मंदिर व समिति के मुख्‍य उद्देश्‍य है ।

                           ‘’श्री गणेश मंदिर बुढापारा’’

सन् 1947 में श्‍यामटाकिज चौक बुढापारा के प्रसिद्ध विध्‍नहर्ता गणेश जी एवं शिव परिवार की स्‍थापना तथा मंदिर का निर्माण किया गया था इस मंदिर परिसर में ही सन् 2007 में श्री साइ बाबा का स्‍वतंत्र मंदिर निर्मित किया है । सन् 2005 में तात्‍कालिक गणेश मंदिर के पुजारी द्धय पं.चन्‍द्रशेखर शुक्‍ला (बेलगांव - साजा वाले) द्धारा श्री गणेश जी से संबंधित ‘’श्री गणेश माला’’ नामक धार्मिक पुस्‍तक का प्रकाशन किया गया था. जो काफी प्रसिद्ध रहा ।

                                 ‘’श्री शदाणी दरबार’’

सिंध संप्रदाय के अष्‍टम संत गोविन्‍द राम जी महाराज ने सन् 1990 में इस मंदिर का निर्माण 17 वीं शताब्‍दी में महान संत शदाराम जी महाराज की पुण्‍य स्‍मृति में करवाया था । पूर्व में इस दरबार का निर्माण पण्‍डरी क्षेत्र में सन् 1960 में कराया गया था । रायपुर के माना क्षेत्र में लगभग 40 एकड क्षेत्र में फैला हुआ यह पवित्र दरबार. सिंधी समुदाय का तीर्थ स्‍थल है जिसमें 12 एकड में सिर्फ मंदिर व दरबार मात्र बना हुआ है । मंदिर की ऊचाइ 60 फीट तथा गुबद 75 फीट उंचा है । इस परिसर के चार बडे – बडे द्धार संत सदा राम. ब्रम्‍हा द्धार. शिव द्धार तथा विष्‍णु द्धार हैं । इस स्‍थल में संपूर्ण भारत के कोने – कोने से तथा पाकिस्‍तान के सिंधी समुदाय के तीर्थयात्री बडी संख्‍या में आते हैं । वर्तमान में नवम संत युधिष्ठिर लाल साहिब यहां कि देखरेख व्‍यवस्‍था में विराजमान है । माना स्थित इस दरबार तीर्थ में वैदिक कालीन ऋषि मुनियों की मूर्तिया. छोटे – छोटे मंदिरों में स्‍थापित है । गोस्‍वामी तुलसीदास जी के नाम पर तुलसी सरोवर बना हुआ है । मंदिर के मुख्‍य द्धार के दोनों तरफ भगवान कृष्‍ण व माता दुर्गा की विराट. भवय व सुन्‍दर मुर्तियां हा । मुख्‍य मंदिर के भीतरी दिवालों पर कांच की कालात्‍मक नक्‍काशी किया गया है तथा शदाणी संतों की महिमा वर्णित है । विभिन्‍न देवी देवताओं सहित भगवान विष्‍णु के 24 अवतारों सुदंर मूर्तियां स्‍थापित है ।इस वृहद परिसर में स्थित इस तीर्थ में प्रतिदिन हजारों की संख्‍या में श्रद्धालु भक्‍तों की भीड लगी रहती है ।