19 October 2017
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पारदर्शिता से नफ़रत है बेईमान वन अधिकारियो को

पारदर्शिता से नफ़रत है बेईमान वन अधिकारियो को

 

डॉ. रमन सिंग के भोलेपन का बेजा लाभ उठा रहे है।

छत्तीसगढ़ के वन विभाग में गत १० वर्षो में हजारो की संख्या में शिकायत हुवे परन्तु उन शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं हुवी। शिकायत की जाँच के नाम पर सिर्फ खाना-पूर्ति की जाती है, वर्ष २००१ की शिकायत की जाँच अभी तक पूरी नहीं हुवी है,
सतर्कता व शिकायत शाखा सिर्फ एक कम्प्यूटर ऑपरेटर के भरोसे चलता है। मेरे द्वारा २०-२५ शिकायत की है पर कोई कार्यवाही नहीं होती, जब तब माननीय कोर्ट में परिवाद दायर नहीं किया जावे तब तक कोई कार्यवाही नहीं होती, जिन लोगो ने माननीय न्यायालय में रिट पिटीशन दायर किया है वो लोग के शिकायत पर तेजी से जाँच हो रही है।

इन दिनों जंगल सफारी में एक पी. आई. एल. लगा है जिसकी चर्चा वन विभाग में जोरो से है.एक वन अधिकारी है जो किसी भी सूचना के अधिकार का कोई जानकारी नहीं देता, अपने आप को हरिश्चन्द्र बताने वाले इस अधिकारी के पास करोडो को सम्पति है, इन दिनों ये दूसरे विभाग में सेवा दे रहे है। जब ये वन अधिकारी रायपुर में पदस्थ थे तब इन्हे रोज कच्ची कल्ली कचनार की चाहिए रहती थी। इनका एक चमचा जो आजकल राजिम में है उन्होंने भी एक मंत्री के पी. ऐ. रहते हुवे करोडो रुपए बनाने। गरियाबंद में एक वन अधिकारी है जो दिन में देशी और रात में विदेशी नशा करते हुवे देखे जाते है। इस अधिकारी ने रायपुर में एक कम्पुटउर ऑपरेटर को छेड़ दिया था।
इनसे चार कदम आगे तो इनके अधीनस्थ एक अधिकारी है, जिनके सेक्स कांडः को पूरा छत्तीसगढ़ जानता है फिर भी ये मूछ पर ताव देखकर चलते है, क्युकी ,,,,,सिंह इज़ किंग,,,, है। वन प्रबंधन समिति के राशि का कैसे गोल-मोल होता है यदि इसकी जाँच करवाया जावे तो १००० करोड़ रुपए का घपला निकलेगा। धमतरी के वो वन ग्राम जहां पर नक्सलाइट का शासन चलता है वहा कैसे वन विभाग के अधिकारी बेखौफ होकर काम करते है इसकी जाँच पुलिस को करनी चाहिए, इन वन ग्राम में वन विभाग के बड़े अधिकारी झाकने भी नहीं जाते।

 

 

नक्सलवाद की असली जड़ भ्रष्टाचार

रायपुर(व.सा.)। छत्तीसगढ़ आर.टी.आई. संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा की सुकुमा में कांग्रेसी नेता और आम आदमी पर नक्सलियों ने जो कायराना हमला की उसका संघ निंदा करता है, नक्सलियों को हथियार फेककर लोकतान्त्रिक व्यवस्था में विश्वास रखकर मुख्य धारा में आना चाहिए, नक्सली देश में अशिक्षित एवं जंगली इलाकों में अपना दादागिरी चलाना बंद करें। वर्तमान भ्रष्ट राजनैतिक व्यवस्था का पैदाइश नक्सलवाद है, शासन को यह जाँच करना चाहिए को कौन-कौन भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट नौकरशाह, भ्रष्ट व्यापारी और उद्योगपति उसकी मदद करते हैं, ऐसे भ्रष्ट तत्वों को खत्म करने के लिए सरकार जनलोकपाल,राइट टू रिजेक्ट,राइट टू रिकाल, रीफरेंडम जैसे कानून आये, शासन हिंसा को हिंसा से खत्म करने की न सोचे जब तक देश में भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, देश से नक्सलवाद खत्म नहीं हो सकता, भ्रष्टाचारी ही अपने मुनाफे के लिए नक्सल गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने दावा किया है की छत्तीसगढ़ वन विभाग में बस्तर क्षेत्र के वृक्षारोपण, बाढ़आपदा,लेंटाना उन्मूलन, अर्गन सुरक्षा, तेंदुपत्ता समिति, कैम्पा मद, बिगड़े वनों के सुधार, रोड़, रपटा, पुलिया के मद पर हजारो- हजार करोड़ रूपये की राशि व्यय की जाती है, इतने ईमानदारी प्रति वर्ष व्यय करने से बस्तर का जंगल स्वर्ग से अति सुन्दर बन सकता है परन्तु सच्चाई यह है की छत्तीसगढ़ वन विभाग के कुछ अधिकारी विकास के मद के पैसे का कुछ हिस्सा खर्च करके शेष बचे हिस्से पर नक्सलियों को हिस्सा देते है, इस बावत अनेक बार शासन को शिकायत मिली है, पर उस शिकायत की जाँच सच्चाई से हो नहीं पाता छत्तीसगढ़ अर्नी भवन के वरिष्ट वन अधिकारी जंगल के अन्दर जाते ही नहीं वे वन विभाग के रेस्ट हाउसमें ही जाँच करके मामले की इतिक्षी क्र भ्रष्टाचार को क्लीन चोट दे देते हैं। अगर नक्सलियों को खत्म कर वर्षों से जमें वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारीयों के यहाँ छापा मारो, करोड़ों रूपये की अनुपात:हीन सम्पत्ति मिलेगी, संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने दावा किया है की वन विभाग के अरण्य भवन मुख्यालय के वित्त,बजट,योजना, कैम्पा शाखा के कुछ अधिकारी वन विभाग का बजट बेचने का कला कारोबार करते हैं इस कारण नक्सली क्षेत्र के कुछ वन अधिकारी अरण्य भवन, वन मुख्यालय से बजट खरीद कर उसका बन्दरबाट कर रहें है, वन विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा अरण्य भवन के वित्त एवं बजट शाखा,योजना शाखा, बाढ़ आपदा से करोड़ों रूपये की राशि से मात्र 20 प्रतिशत राशि को ही व्यय करते है, शेष 80 प्रतिशत राशि को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा देते है, इन्हीं करोड़ो रूप में काले धन से नक्सली अपना हिस्सा लेकर अपनी नक्सली गतिविधियों को चलाते है,सबसे दुखद बात तो यह है की इस बात की जानकारी स्थानीय थाने की पुलिस अधिकारियों को भी रहती है परन्तु वे भी अपना हिस्सा लेकर चुप बैठ जाते हैं, कुछ जानकारों के मुताबिक वन विभाग के अरण्य भवन के अधिकारियों के बजट बेचने का काला कारोबारकी जानकारी पुलिस को है पर वे सी.सी.एफ. स्तर के अधिकारियों पर हाथ नहीं डालना चाहते उस बाबत आर.टी.आई.संघ ने अनेकों शिकायत शासन को की परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई,जिस कारण अरण्य भवन के भ्रष्ट अधिकारियों का हौसला बुलंदी पर है।

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