21 July 2017
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BREAKING NEWS

विवेक ढाड के शपथ पत्र देने के बावजूद तेजी से बढ रहा पुरानी बस्ती थाने क्षेत्र में अवैध कब्ज़ा

मुख्य सचिव, विवेक ढाड ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के प्रकरण नंबर – एस. एल.पी. -8591-2006, केंद्र शासन विरुद्ध गुजरात राज्य एवं अन्य में सार्वजनिक स्थलों से अवैध कब्ज़ा को हटाने तथा नया अवैध कब्ज़ा नहीं करने देने संबधित शपथ पत्र माननीय सुप्रीम कोर्ट में दिया है पर उसका शपथ पत्र का पालन पुरानी बस्ती थाने क्षेत्र में नहीं हो रहा है, पुरानी बस्ती थाने क्षेत्र में तेजी से अवैध कब्जे बढ रहे है, इन अवैध कब्जे के आड़ में तरह – तरह के अपराध भी पलते है जैसे कुछ अंडा ठेला में शराब गुप-चुप तरीके से पिलाया जाता है वही कुछ ठेला सट्टा पट्टी लिखने का काम करती है कुछ ठेला में तो खुले आम लाल गैस सिलेंडर लगा कर आम नागरिक का जान जोखिम में डाला जाता है, कुछ अंडा ठेला तो आधी रात तक फ़िल्मी गाना बजाते हुवे दादागिरी से अंडा व मटन कीमा बेचते है, सरकारी सड़क में खुले में लाल सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग करना आम राहगीरों के साथ उनके जान से खिलवाड़ करना है, पुरानी बस्ती थाने क्षेत्र के लाखे नगर में एक सार्वजनिक भवन है जो भी माननीय सुप्रीम कोर्ट के प्रकरण नंबर – एस. एल.पी. - 8591-2006, केंद्र शासन विरुद्ध गुजरात राज्य एवं अन्य में उन सूची में है जिन्हे तोडा जाना है, जिसको जिला प्रशासन, रायपुर को तोडने की जवाबदारी है पर वोट बैंक की राजनीती के चलते लाखे नगर के उस सार्वजनिक भवन को तोडा नहीं जा रहा है, पुरानी बस्ती थाने क्षेत्र में लाखे नगर से लोहार चौक फिर लोहार चौक से पुरानी बस्ती थाने तक की अनेक कपडा दुकानों में आदमी का पुतला को शो पीश के रूप में रख कर 10  फीट की सार्वजनिक रोड को घेर लिया गया है, वही बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर के द्वारा अपना ट्रेक्टर को रोड में पार्किंग कर यातायात जाम किया जाता है, इस कारण बीमार लोगो को आने – जाने में भारी असुविधा होती है, ये कहा का इंसाफ है पैसा कमाए व्यापारी - परेशानी झेले आम राहगीर, जबकि मुख्य सचिव, विवेक ढाड में माननीय सुप्रीम कोर्ट के प्रकरण नंबर – एस. एल.पी. -8591-2006, केंद्र शासन विरुद्ध गुजरात राज्य एवं अन्य में सार्वजनिक स्थलों को बचने तथा उन्हें अवैध कब्ज़ा से मुक्ति दिलाने के शपथपत्र दिए है पर उनके शपथपत्र के विरुद्ध जिला प्रशासन, रायपुर व पुलिस प्रशासन रायपुर व पुरानी बस्ती थाना कोई भी गभीर कार्यवाही नहीं करती है, अब जब अगली सुनवाई माननीय सुप्रीम कोर्ट में होगी तो इस पर फिर से कार्यवाही हेतु माननीय सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया जावेगा .

रायपुर शहर में ध्वनि व वायु, जल प्रदुषण तेजी से बढ रहा

रायपुर शहर में ध्वनि व वायु, जल पर लगाम लगाने में शासन असफल है, जिसके लिए तेजी से

बढ रहे अवैध कब्जे भी जिम्मेदार है, नगर पालिका निगम, रायपुर में कूड़ा फलाने वालों पर कोई

कार्यवाही नहीं करती जिस कारण रायपुर शहर में तेजी से कूड़ा फैलता है, सिर्फ डॉ रमन सिंग के

निवास के आस –पास को छोड़ कर कही भी रायपुर में सफाई नज़र नहीं आती, वही ध्वनि प्रदुषण

करने वालो के सामने छत्तीसगढ़ शासन असहाय है, जिसको जैसी मर्जी टाटा की गाड़ी के डाला से कोई

४ फिट बाहर निकल कर ध्वनि प्रदुषण करता है तो कोई ६ फिट डाला से बाहर निकल कर ध्वनि

प्रदुषण करता है रायपुर पुलिस के थाने के सामने रोज ये नज़ारा देखा जा सकता है, आखिर क्या

कारण है की गाड़ी के डाला से बाहर ३ से ६ फिट तक निकाल कर जो लोग ध्वनि प्रदुषण करते है

उनकी गाड़ी पर पहली बार में जुर्माना व दूसरी बार में गाड़ी जप्ती की कार्यवाही होनी चाहिए पर ऐसा

कुछ नहीं होता गाड़ी के डाला से बाहर कुछ भी सामान व चीज निकलता है तो उस पर रायपुर पुलिस

या यातायातपुलिस या परिवहन विभाग कार्यवाही करने का अधिकार रखते है पर ये तीनो में से कोई भी

गाड़ी सेबाहर डाला निकलने पर कोई कार्यवाही नहीं करता जिस कारण तेजी से ध्वनि प्रदुषण रायपुर में 

बढ रहा है, माननीय सुप्रीम कोर्ट कहता है की ध्वनि विस्तार यंत्र को ईतना धीरे बजावो की १२ फिट बाई

१२ फिट से ज्यादा कमरे से आवाज़ बाहर ना जावे पर माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जमकर धज्जियां

उड़ाई जाती है, बकायदा रायपुर पुलिस के आई.पी.एस. के सामने टाटा की गाड़ी के डाला से ३ से ६ फिट

बाहर निकाल कर रोड का यातायात जाम करते हुवे कान फोड़ देने वाले आवाज़ से ड्रम पिटते हुवे हल्ला

करते है, रायपुर पुलिस नजर चुरा कर वहा से भाग जाती है, कई बार जब पुलिस को हल्ला बंद कराते

देखे जाने पर खुद पुलिस को विवश होते देखा जा सकता है, सबसे ज्यादा मुश्किल शादी घर के आस पास के

लोगो को होता है जब रात रात भर शादी घर में जोर जोर से गाना बजता है, नगर निगम, रायपुर को चाहिये की घनी आबादी वाले जगह में शादी घर की अनुमति ना देवे परन्तु ऐसा नहीं होता जिसको जहा मर्जी है वहा पोगा तान कर दिन-रात हल्ला करो जब थाने में जावोगे तो दोनों के खिलाफ १०७, ११६ का मुकदमा दर्ज कर दिया जावेगा, जबकि

रायपुर पुलिस को स्वत सझान में लेकर हल्ला करने वालो जेल में बंद किया जाना चाहिये, परन्तु रायपुर पुलिस हल्ला करने वालो का रखवाला बन बेठी है, जबकि सभी शादीघर वाले , साउंड सिस्टम वाले से शपथपत्र में लिखवाना चाहिये की यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध कोलाहल किये तो शांति भंग करने का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देना चाहिए परन्तु ये काम ना करके इतजार कर रहे है जब माननीय सुप्रीम कोर्ट से जब अवमानना का

नोटीस आये उसका इंतजार कर रहे है.www.vafadarsaathi.com

पुलिस से आर.टी.आई. जेल जाने को तैयार रहो


रायपुर (व.सा.)।छत्तीसगढ़ पुलिस में आर.टी.आई. के तहतजानकारी लेना मतलब यह है की मुसीबत मोल लेना खासकर पुलिस विभाग से जानकारी लेना अपने आप में सरदर्द पालने जैसा है कई बार पुलिस विभाग का अपराधी पकड़ने वाला गाड़ी में सवार होकर आर.टी.आई.कार्यकर्ता के पास दस्तावेज देने चले जाते है।पुलिस वाहन से जाने का मकसद आर.टी.आई. कार्यकर्ता को मानसिक रूप से यह यातना देना रहता है कि हम तुम्हारे आर.टी.आई. से नहीं डरते और यह सही भी है पुलिस जिसे चाहे जब चाहे अपराधी बनाकर जेल भेज देती है मानवाधिकारों के कानून को अपने जुटे तले रौंदना छत्तीसगढ़ पुलिस कि शान। इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक के घोटालेबाज कि नार्को टेस्ट एवं ब्रेन मैपिंग कि गई थी जिस पर आर.टी.आई. के तहत अभी तक सी.डी. नहीं दी गई इतना ही नही उस सी.डी.को मानवीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत भी नहीं किया गया छत्तीसगढ़ पुलिस का अजीब कानून है कि नार्को टेस्ट एवं ब्रेन मैपिंग कि सी.डी. को सार्वजनिक करने से घबरा रही है।आर.टी.आई. कि धारा 4 को छत्तीसगढ़ पुलिस बिलकुल भी पालन नहीं करती इतना ही नहीं आर.टी.आई. के मुताबिक प्रत्येक थानों में 5 फूट चौड़ा लोहे का मजबूत बोर्ड लगा होना चाहिये जिससे कि आर.टी.आई. से संबंधित सभी जानकारी प्रदर्शित हो परन्तु छत्तीसगढ़ पुलिस के प्रदेश मुख्यालय,रेंज मुख्यालय,जिला मुख्यालय,एवं थानों में कहीं भी आर.टी.आई. से संबंधित उक्त बोर्ड नहीं लगा।आर.टी.आई. कि जानकारी देनेसे बचने के लिये पुलिस के मक्कार अधिकारी तरह- तरह के आइडिया ढूंढते रहते हैं और हर महीने अलग-अलग तरीके से जानकारी नहीं देने का चाल चलते हैं वर्तमान में पुलिस विभाग से जानकारी मांगने पर यह लिखकर एक पत्र भेज दिया जाता है कि जानकारी कि दिनांक,थाना, कार्यालय बताये अब सवाल यह उठता है कि आवेदक को कैसे पता चलेगा कि मामला कब का है और किस थाने में है क्या आवेदक में इतनी हिम्मत होगी की वो थाने जाकर थाने से यह पूछ ले की मामला कब कहां का है अगर इतना रामराज रहा तो फिर सूचना का अधिकार लगाने की नौबत ही नहीं आती अंग्रेजों के बनाये हुए कानून हमारे लिए इतने सिरदर्द बन जायेंगे ऐसा हमने सपने में भी नहीं सोचा था। सबसे खास बात तो यह है की इन सब मामलों में सरकार भी चुप्पी साझे

कार्यालय कृषि उपज मंडी समिति आरंग. जिला – रायपुर (छ.ग.) के आडिट आब्जेक्शन का ब्यौरा जस का तस - भाग - 5

17) ऋण:- 1111111111DSGFDS11

अ छ.ग. राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड रायपुर द्वारा पत्र क्रमांक / बी/6/108 आरंग 07 -08 / 5053 रायपुर दिनांक – 27.11.07 को आधारभूत संरचना विकास कार्य हेतु विकास मद से रु. 8872200.00 6 प्रतिशत ब्‍याज की दर से 15 वर्ष के लिए कृ.उ.मं. आरंग हेतु ऋण स्‍वीकृत किया जाना पाया गया जो कि दो किश्‍तों में कृ.उ.मं. आरंग को प्राप्‍त हो गया ।

ब   प्रबंध संचालक मण्‍डी बोर्ड पत्र क्रमांक / बी/ 3/ 1-3 / स्‍वी. / लेखा/ बाउण्‍ड्रीवांल / कृषक विश्राम गृह हेतु 20 लाख का ऋण स्‍वीकृत किया गया 4 प्रतिशत ब्‍याज की दर से भुगतान किया जाना है । दिनांक 31.03.11 तक मूलधन राशि 14 लाख रु. जमा किया जाना पाया गया । रु. 6 लाख जमा हेतु शेष है । विवरण प्रतिवेदन के परिशिष्‍ट क्रमांक 05 में संलग्‍न है ।

 

 

18) आर्थित स्थिति :-

         कृषि उपज मण्‍डी आरंग अर्थवर्ष 2008-09 से 09- 10 तक आर्थित स्थिति दर्शाने वाला पत्रक दिनांक 31.03.2011 कर स्थिति में प्रतिवेदन के परिशिष्‍ट क्रमांक 06 में संलग्‍न है ।

19) लेखा स्थिति:-

       कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग की लेखा स्थिति सामान्‍यत: संतोषजनक पायी गयी फिर भी अनुज्ञप्ति पंजी. गोदाम किराया पंजी. स्‍कंध पंजी; संपत्ति पंजी. ऋण एवं अनुदान पंजी का संधारण निर्धारित प्रारुप में तैयार किये जाने बाबत मण्‍डी समिति के पदाधिकारियों का ध्‍यान आकृष्‍ट किया जाता है ।

 

20) अंकेक्षण शुल्‍क :-

           अर्थवर्ष 08-09 से 09-10 का अंकेक्षण शुल्‍क ज्ञापन अंकेक्षण दल के पत्र क्रमांक / आर.के/ 2011/ 119/ आरंग दिनांक – 02.05.11 के माध्‍यम से जारी किया गया । अंकेक्षण शुल्‍क की राशि रु. 160941.00 निर्धारित शीर्ष में जमा कर कार्यालय उपसंचालक स्‍थानीय निधि संपरीक्षा रायपुर के सक्षम चालान का मूल प्रति प्रस्‍तुत कर जमा का सत्‍यापन करा लिया जावे ।

 

21) अंकेक्षण के दौरान वसूली :-

       अंकेक्षण के दौरान वसूली निरंक रही ।

 

22) अंकेक्षण प्रतिवेदन भाग दो :-

           अंकेक्षण प्रतिवेदन भाग दो की स्थिति निरंक रही । अत: अंकेक्षण प्रतिवेदन भाग दो तैयार नहीं किया गया ।

कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग जिला – रायपुर (छ.ग.)

दिनांक 31.03.11 की स्थिति में मण्‍डी शुल्‍क बकाया का विवरण

क्र.     व्‍यापारी का नाम           मांग             जमा               बकाया

       अर्थवर्ष 2008-09

1     में सूर्या ट्रेडर्स आरंग         180595.00       148000.00         32595.00

2     में शंकर राइस मिल आरंग     152478.00       123655.00         28823.00

3     में आदित्‍य राइस मिल आरंग   44163.00       26432.00           17731.00

4     में आरंग राइस मिल आरंग    250535.00     173705.00         76830.00

       अर्थवर्ष 2009-10

1     में सूर्या ट्रेडर्स आरंग           25033.00       --------             25033.00

2     में शंकर राइस मिल आरंग     110061.00       104299.00           5762.00

3       में साईनाथ राइस मील       1109.00         --------             1109.00

         अर्थवर्ष 2010- 11

1       में सूर्या ट्रेडर्स आरंग         4667.00         --------             4667.00

2       में महावीर राईस मील       394843.00       305000.00           89843.00

                                 1163484.00       881091.00           282393.00

कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग जिला – रायपुर वर्ष 2008 – 09 से 10-11

दिनांक – 31.03.11 की स्थिति में अग्रिम एवं बकाया ऋण का विवरण :-

क्र.   कर्मचारी का नाम             अनाज       त्‍यौहार       आवास       कुल

1   श्री अवधराम साहू उप निरीक्षक   1200         600         7650       9450

2   श्री रेखूराम ध्रुव निरीक्षक         1200         600        -------       1800

3   श्री चंद्रभूषण चंद्राकर उप निरी.     1200         600         --------      1800

4   श्री अक्तिराम बिसरा उप निरी.     1200         600         --------      1800

5   श्री राकेश तिवारी उप निरी.       1200         600         --------      1800

6   श्री बेनीराम चंद्राकर उप निरी.     1200         600         --------       1800

7   श्री सन्‍तोष पाण्‍डेय लिपिक         1200         600         --------       1800

8   श्री सीताराम ठाकुर लिपिक         1200         600         --------      1800

9   श्री नरीसिंह पाण्‍डेय भृत्‍य         1200         600         78160        1800

10   श्री फग्‍गूमल पुरेना भृत्‍य         1200         600         ------       1800

11   श्री खोमनलाल साहू भृत्‍य         1200         600         ------       1800

12 श्री सावित्री बाई साहू भृत्‍य           1200         600         246500     248300

                                   14400      7200         332310     353910

कृषि उपज मण्‍डी समिति आरंग जिला – रायपुर (छ.ग.) चल संपत्ति एवं दायित्‍व पत्रक दिनांक 31.03.2011 की स्थिति में :-                                                            कण्डिका क्रमांक – 18

                                                                       परिशिष्‍ट क्रमांक – 06

क्र.   आस्तिया                   राशि           दायित्‍व                 राशि

1 केशबुककेअनुसारशेष                         ऋण अदायगी हेतु शेष           947200.00

क नगद                       14480.00         बोर्ड शुल्‍क ब‍काया               20903.00

ख बैंक                       34839332.89     विपणन विकास निधि          7597.00

2 विनियोजन (सावधि जमा)     25143048.00     आरक्षित निधि                726.00

3 बकाया मांग                                  अमानत (प्रतिभूति)             301340.00

क मण्‍डी शुल्‍क                 282393.00

ख अनुज्ञप्ति शुल्‍क               7400.00

स गोदाम किराया (दुकान शेण्‍ड्री   50331.00

4   बकाया अग्रिम एवं ऋण      353910.00             आधिक्‍य                   84525128

शांप)

5 छ.ग.राज्‍य विपणन संघ का मण्‍डी 33636621.00  

शुल्‍क बकाया    

     योग                     94327895.89           योग                     94327895.89                                    

        

पुलिस कर रही सूचना अधिकार का हनन

रायपुर (व.सा.)। छत्तीसगढ़ पुलिस से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगना मतलब घर बैठे मुसीबत मोल लेना जैसे,छत्तीसगढ़ पुलिस जानकारी तो नहीं देती उल्टा
थाने से फर्जी मुकदमा दर्ज करने के षडयंत्र चालू हो जाते हैं,छत्तीसगढ़ के किसी भी पुलिस थानों में सूचना के अधिकार से संबंधित बोर्ड नहीं लगे हुए  हैं जबकि सूचना के अधिकार के तहत 4 फीट लम्बा लोहे का बोर्ड लगा रहना अनिवार्य है।

 

हमने सूचना के अधिकार के तहत जोगी सरकार के समय हुए बहुचर्चित सूमाकू फ़ूड पार्क घोटाल के खात्मे रिपोर्ट की कार्यवाही छत्तीसगढ़ राज्य इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कार्पोरेशन से मांगी थी परन्तु इन्होंने उक्त खात्मे की रिपोर्ट हेतु राजनांदगांव पुलिस अधिक्षक को लेख कर आवेदक अनिल अग्रवाल को जानकारी हेतुलेख किया जिस पर राजनांदगांव पुलिस अधिक्षक ने कोई पत्राचार नही किया परन्तु दुर्ग पुलिस अधिक्षक कार्यालय से पत्र आया की यह प्रकरण किस थाने से संबंधित है तथा किन-किन दस्तावेज की प्रति चाहिए बताये,जब पुलिस अधिक्षक कार्यालय को करोड़ों रूपये के हुये घोटाले की फाईल किस थाने में रखी है, इसकी जानकारी नहीं है तो फिर आवेदक को जानकारी कैसे होगी,क्योंकि आवेदक को कोई भी बेईमानी करने के बाद पुलिस सूचना तो देती नहीं फिर आवेदक कैसे बतायेगा की खात्मा रिपोर्ट कहां है।